ऐतिहासिक निर्णय पर स्वराज का आभार राष्ट्र-जनों को बधाई साधुवाद के पात्र है, प्रधानमंत्री
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
राष्ट्र-जन और मानव धर्म के मार्ग में एक के बाद एक हो रहे ऐतिहासिक निर्णयों पर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल होना स्वभाविक है और संतोष व्यक्त करना भी स्वभाविक क्रिया है। मगर सृजन के विरूद्ध स्वार्थवत सवालों की स्वीकार्यता अनादिकाल से किसी भी सभ्य सृजनात्मक समाज में नहीं रही है। लोकतंत्र में वैचारिक टकराव और संस्कार अनुरूप भाषा बोली के कुतर्कपूर्ण व्यवहार में अस्वीकार्यता, सहमति-असहमति सियासी, बैवसी हो सकती है। मगर मानव धर्म की बाध्यता सिर्फ और सिर्फ सर्वकल्याण में ही है।
नई शिक्षा नीति 2020 का जो निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार ने लिया निश्चित ही वह ऐतिहासिक है। इसे सत्ता का सामर्थ और पुरूषार्थ ही कहा जायेगा जिसकी अपेक्षा सत्ताओं से इस महान भूभाग पर आशा-आकांक्षाओं को सैकडों वर्षो से रही है। निश्चित ही महान भारतवर्ष के महान भूभाग पर 2020 में यह निर्णय भविष्य में युग-दृष्टा साबित हो, तो किसी को अतिसंयोक्ति नहीं होना चाहिए। विगत दो दशक से जिस तरह से अपने संसाधनों के बीच स्वराज ने देश में नई शिक्षा पद्धति और नीति को लेकर जो अभियान अपने स्तर पर सत्ताओं और बाल्यजनों के बीच छेड रखा था जिसमें बाल्य स्वभाव के बीच शिक्षा की महत्वता शिक्षा की आधार पद्धति और शिक्षा सूत्रों पर चर्चा कर चर्चा मार्गदर्शन तथा सत्ता से जुडे लोगों से सवाल-जबाव, लेखन, पठन-पाठन, सुझाव इत्यादि चर्चाओं का परिणाम यह हुआ कि आज इस महान राष्ट्र की अब अपनी एक समृद्ध सुसंस्कृत शिक्षा नीति होगी। अगर मुझे ठीक से याद है तो कई मर्तवा देश की नई शिक्षा नीति निर्माण और मौजूद शिक्षा पद्धति में अविलंब बदलाव स्वभाव अनुरूप रोजगार, संस्कार उन्मुख शिक्षा नीति पर चर्चा उसकी परिकल्पना और सवाल करने का मौका पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्व. अर्जुन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व शिक्षा मंत्री महेन्द्र सिंह कालूखेडा, पूर्व राज्यपाल स्व. बलराम जाखड पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मंत्री कैलाश जोशी, पूर्व राज्यपाल हरियाणा तथा तत्कालिन संगठन मंत्री भाजपा कप्तान सिंह सोलंकी, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्तमान राज्यसभा सदस्य, मंत्री उमाशंकर गुप्ता, नरोत्तम मिश्रा तथा म.प्र. के पूर्व संगठन मंत्री अरविन्द्र मेनन तथा वर्तमान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी मिला।
मगर सोशल मीडिया के अवतार ने स्वराज के मार्ग को नई शिक्षा नीति निर्माण के लिए सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान सत्ताओं को जगाने में किया। जिसके चलते सत्ता सरकार से जुडे लोगों का ध्यान भी स्कूल और शिक्षा नीति की ओर बढा। मगर सबसे बडा कार्य देश के प्रधानमंत्री ने सीधे स्कूली बच्चों से संवाद स्थापित कर शिक्षा को चर्चा के केन्द्र में लाकर किया। आज प्रधानमंत्री के सबसे बडे इस ऐतिहासिक सार्थक निर्णय ने यह साबित कर दिया कि केन्द्र में मौजूद नेतृत्व के पास वह अदम्य साहस भी है और पुरूषार्थ भी जो राष्ट्र-जन की खातिर निर्णय कितने भी कडे हो या बडे हो। उन्हें लेने में सरकार को न तो कभी कोई हिचकिचाहट संकोच रहा और न ही होगा। निश्चित ही प्रधानमंत्री और उनकी समूची टीम बधाई आभार और साधुवाद की हकदार है। आज के लिए आमजन को यह सबसे बडी समझने वाली बात होना चाहिए। क्योंकि यह राष्ट्र के लिए वह स्वर्णयम अवसर है जब वह विश्वभर में अपनी सर्वमान्य पहचान और पुरूषार्थ सिद्ध कर सके। जिस बहुमूल्य समय को वाद-विवाद, वैचारिक अवसाद में व्यक्त कर इसे न गंवाये यहीं इस महान राष्ट्र और जन के हित में होगा।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
राष्ट्र-जन और मानव धर्म के मार्ग में एक के बाद एक हो रहे ऐतिहासिक निर्णयों पर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल होना स्वभाविक है और संतोष व्यक्त करना भी स्वभाविक क्रिया है। मगर सृजन के विरूद्ध स्वार्थवत सवालों की स्वीकार्यता अनादिकाल से किसी भी सभ्य सृजनात्मक समाज में नहीं रही है। लोकतंत्र में वैचारिक टकराव और संस्कार अनुरूप भाषा बोली के कुतर्कपूर्ण व्यवहार में अस्वीकार्यता, सहमति-असहमति सियासी, बैवसी हो सकती है। मगर मानव धर्म की बाध्यता सिर्फ और सिर्फ सर्वकल्याण में ही है। नई शिक्षा नीति 2020 का जो निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार ने लिया निश्चित ही वह ऐतिहासिक है। इसे सत्ता का सामर्थ और पुरूषार्थ ही कहा जायेगा जिसकी अपेक्षा सत्ताओं से इस महान भूभाग पर आशा-आकांक्षाओं को सैकडों वर्षो से रही है। निश्चित ही महान भारतवर्ष के महान भूभाग पर 2020 में यह निर्णय भविष्य में युग-दृष्टा साबित हो, तो किसी को अतिसंयोक्ति नहीं होना चाहिए। विगत दो दशक से जिस तरह से अपने संसाधनों के बीच स्वराज ने देश में नई शिक्षा पद्धति और नीति को लेकर जो अभियान अपने स्तर पर सत्ताओं और बाल्यजनों के बीच छेड रखा था जिसमें बाल्य स्वभाव के बीच शिक्षा की महत्वता शिक्षा की आधार पद्धति और शिक्षा सूत्रों पर चर्चा कर चर्चा मार्गदर्शन तथा सत्ता से जुडे लोगों से सवाल-जबाव, लेखन, पठन-पाठन, सुझाव इत्यादि चर्चाओं का परिणाम यह हुआ कि आज इस महान राष्ट्र की अब अपनी एक समृद्ध सुसंस्कृत शिक्षा नीति होगी। अगर मुझे ठीक से याद है तो कई मर्तवा देश की नई शिक्षा नीति निर्माण और मौजूद शिक्षा पद्धति में अविलंब बदलाव स्वभाव अनुरूप रोजगार, संस्कार उन्मुख शिक्षा नीति पर चर्चा उसकी परिकल्पना और सवाल करने का मौका पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्व. अर्जुन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व शिक्षा मंत्री महेन्द्र सिंह कालूखेडा, पूर्व राज्यपाल स्व. बलराम जाखड पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मंत्री कैलाश जोशी, पूर्व राज्यपाल हरियाणा तथा तत्कालिन संगठन मंत्री भाजपा कप्तान सिंह सोलंकी, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्तमान राज्यसभा सदस्य, मंत्री उमाशंकर गुप्ता, नरोत्तम मिश्रा तथा म.प्र. के पूर्व संगठन मंत्री अरविन्द्र मेनन तथा वर्तमान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी मिला।
मगर सोशल मीडिया के अवतार ने स्वराज के मार्ग को नई शिक्षा नीति निर्माण के लिए सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान सत्ताओं को जगाने में किया। जिसके चलते सत्ता सरकार से जुडे लोगों का ध्यान भी स्कूल और शिक्षा नीति की ओर बढा। मगर सबसे बडा कार्य देश के प्रधानमंत्री ने सीधे स्कूली बच्चों से संवाद स्थापित कर शिक्षा को चर्चा के केन्द्र में लाकर किया। आज प्रधानमंत्री के सबसे बडे इस ऐतिहासिक सार्थक निर्णय ने यह साबित कर दिया कि केन्द्र में मौजूद नेतृत्व के पास वह अदम्य साहस भी है और पुरूषार्थ भी जो राष्ट्र-जन की खातिर निर्णय कितने भी कडे हो या बडे हो। उन्हें लेने में सरकार को न तो कभी कोई हिचकिचाहट संकोच रहा और न ही होगा। निश्चित ही प्रधानमंत्री और उनकी समूची टीम बधाई आभार और साधुवाद की हकदार है। आज के लिए आमजन को यह सबसे बडी समझने वाली बात होना चाहिए। क्योंकि यह राष्ट्र के लिए वह स्वर्णयम अवसर है जब वह विश्वभर में अपनी सर्वमान्य पहचान और पुरूषार्थ सिद्ध कर सके। जिस बहुमूल्य समय को वाद-विवाद, वैचारिक अवसाद में व्यक्त कर इसे न गंवाये यहीं इस महान राष्ट्र और जन के हित में होगा।
जय स्वराज
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