मातहतों का दंश भोगते मुखिया जल्द जन कल्याण की खातिर स्वस्थ होंगे शिवराज
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
यूं तो कोरोना एक ऐसी संक्रमित बीमारी समूचे विश्व में उभरी है जिसकी सावधानी के अलावा न तो कोई काट है और न ही कोई दवा। लगातार बढते संक्रमितों की संख्या ने समूचे मानव जगत को हिलाकर रख दिया है। मगर इस महामारी से भी मानव जीवन कुछ सीख, समृद्ध स्वस्थ जीवन निर्वहन की खातिर करेगा, यह वर्तमान हालातों को देखकर नहीं लगता। अगर खबरों की माने तो जितने सजग और सतर्क रह म.प्र. के मुख्यमंत्री जनसेवा कल्याण का बीडा उठा अपने कत्र्तव्य निर्वहन में लगे थे और मातहत सहयोगियों के आचार व्यवहार को लेकर चिंतित रहते थे वह शायद किसी से छिपा हो। मगर कहते है कि जबावदेह पद पर रहते जबावदेही से मुंह नहीं मोडा जा सकता और उन परम्पराओं को भी नहीं टाला जा सकता, जो संस्कारों के मान-सम्मान और स्वाभिमान से जुडी होती है। शायद निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का ही वह मार्ग था जहां म.प्र. के मुख्यमंत्री से चूक हुई और वह स्वयं संक्रमित हो गये। सुखद बात यह है कि मुख्यमंत्री का सियासी जीवन जो भी हो, मगर निश्चित रूप से वो मानव के रूप में एक नेकदिल इंसान है और कहते है कि नेकी की जडे पाताल तक होती है सो उनके लिए ही नहीं उनके जनकल्याण के लिए निश्चित संकट की घडी है। मगर वह स्वस्थ होंगे और सेवा कल्याण में पुनः निष्ठापूर्ण ढंग से जुटेंगे ऐसी आशा और उम्मीद ईश्वर से सभी को होना चाहिए। जिनकी मानव धर्म की रक्षा उसके संरक्षण सम्बर्धन में आस्था है।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
यूं तो कोरोना एक ऐसी संक्रमित बीमारी समूचे विश्व में उभरी है जिसकी सावधानी के अलावा न तो कोई काट है और न ही कोई दवा। लगातार बढते संक्रमितों की संख्या ने समूचे मानव जगत को हिलाकर रख दिया है। मगर इस महामारी से भी मानव जीवन कुछ सीख, समृद्ध स्वस्थ जीवन निर्वहन की खातिर करेगा, यह वर्तमान हालातों को देखकर नहीं लगता। अगर खबरों की माने तो जितने सजग और सतर्क रह म.प्र. के मुख्यमंत्री जनसेवा कल्याण का बीडा उठा अपने कत्र्तव्य निर्वहन में लगे थे और मातहत सहयोगियों के आचार व्यवहार को लेकर चिंतित रहते थे वह शायद किसी से छिपा हो। मगर कहते है कि जबावदेह पद पर रहते जबावदेही से मुंह नहीं मोडा जा सकता और उन परम्पराओं को भी नहीं टाला जा सकता, जो संस्कारों के मान-सम्मान और स्वाभिमान से जुडी होती है। शायद निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का ही वह मार्ग था जहां म.प्र. के मुख्यमंत्री से चूक हुई और वह स्वयं संक्रमित हो गये। सुखद बात यह है कि मुख्यमंत्री का सियासी जीवन जो भी हो, मगर निश्चित रूप से वो मानव के रूप में एक नेकदिल इंसान है और कहते है कि नेकी की जडे पाताल तक होती है सो उनके लिए ही नहीं उनके जनकल्याण के लिए निश्चित संकट की घडी है। मगर वह स्वस्थ होंगे और सेवा कल्याण में पुनः निष्ठापूर्ण ढंग से जुटेंगे ऐसी आशा और उम्मीद ईश्वर से सभी को होना चाहिए। जिनकी मानव धर्म की रक्षा उसके संरक्षण सम्बर्धन में आस्था है। जय स्वराज
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