कोरोना ने बैठाला जीवन का भट्टा दहशत में लोग
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
विगत माहों से जब से कोरोना ने दस्तक दी है तभी से मानवीय जीवन हाल-बेहाल बना हुआ है। कभी जिन्दा रहने जीवोपात्र्जन का संघर्ष तो कभी कोरोना से बचने स्वास्थ्य की चिन्ता, जिसके लिए लोगों ने घरों में रह कष्ट भी भोगा और सुनहरे भविष्य का दंश भी झेला। मगर अब जब कोरोना के दस्तक दिये 4 महीने पूर्ण होने को है। ऐसे में कोरोना की बढती रफ्तार ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। अब न तो लोगों की ट्रवल-हिस्ट्री तैयार हो पा रही और न ही संक्रमित व्यक्ति को संक्रमण के कारण मालूम हो पा रहे है। मगर कहते है कि जब जीवन ही स्वकल्याण की सोच में अचेतन हो ऐसे में सर्वकल्याण और संक्रमण से बचाव फिर कैसे संभव है। यह आज सभी को समझने वाली बात होना चाहिए। ये अलग बात है कि आज भी लोग कोरोना संक्रमण के प्रति सजग न हो, मगर आने वाले दिनों में यहीं हाल रहा तो मानवीय जीवन दवा आने तक बडे गहरे संकट में सावधानी के आभाव में पढने वाला है। जो न तो जीवन के हित में और न ही मानवता के हित मेे।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
विगत माहों से जब से कोरोना ने दस्तक दी है तभी से मानवीय जीवन हाल-बेहाल बना हुआ है। कभी जिन्दा रहने जीवोपात्र्जन का संघर्ष तो कभी कोरोना से बचने स्वास्थ्य की चिन्ता, जिसके लिए लोगों ने घरों में रह कष्ट भी भोगा और सुनहरे भविष्य का दंश भी झेला। मगर अब जब कोरोना के दस्तक दिये 4 महीने पूर्ण होने को है। ऐसे में कोरोना की बढती रफ्तार ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। अब न तो लोगों की ट्रवल-हिस्ट्री तैयार हो पा रही और न ही संक्रमित व्यक्ति को संक्रमण के कारण मालूम हो पा रहे है। मगर कहते है कि जब जीवन ही स्वकल्याण की सोच में अचेतन हो ऐसे में सर्वकल्याण और संक्रमण से बचाव फिर कैसे संभव है। यह आज सभी को समझने वाली बात होना चाहिए। ये अलग बात है कि आज भी लोग कोरोना संक्रमण के प्रति सजग न हो, मगर आने वाले दिनों में यहीं हाल रहा तो मानवीय जीवन दवा आने तक बडे गहरे संकट में सावधानी के आभाव में पढने वाला है। जो न तो जीवन के हित में और न ही मानवता के हित मेे।
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