कोरोना विस्फोट से सहमी मानवता आये दिन बढते कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर उठे सवाल
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
ये सही है कि खबर सच हो या फिर झूठ किसी को कोई फर्क पडने वाला नहीं। क्योंकि वर्तमान हालातों को मद्देनजर कहा जा सकता है कि ऐसा राज और ऐसी आजादी शायद किसी देश-प्रदेश को मिली हो। कहते है कि जहां समझ समझाईस और जीवन निर्वहन के संस्कार निज स्वार्थो के आगे एक दूसरे से जुदा हो ऐसे में सत्यानाशी संस्कारों का प्रार्दुभाव होना स्वभाविक है। अगर 7 लाख के पार जा पहुंचे देश के आंकडे को अगर हम दरकिनार कर दें और म.प्र. के अन-उपलब्ध आंकडों पर चुप्पी साध लें, तो खुद के शहर का क्या करें जहां आये दिन निकलते संक्रमितों की संख्या ने कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज कर दी है। बढते आंकडो को देख भले ही एक मर्तवा फिर से लाॅकडाउन का सहारा सत्ताओं में और शासन ने लिया हो। मगर जो बिगाड खाता अनलाॅकडाउन के चलते हो चुका है उसके आंकडे जानने और भरपाई करने कम से कम अगर अगले दिन से एक भी मरीज नहीं मिलता है तो मौजूद आंकडों के साथ 7 दिन से लेकर 14 दिन तक तो कोरोना से मुक्ति के लिए इंतजार करना ही होगा।
मगर लगता नहीं कि अगले 14 दिन तक एक भी संक्रमित न मिले। अगर संक्रमित मिलने का क्रम हर रोज जारी रहा है तो उसी क्रम में अगले 14 दिन तक संक्रमण रोकने सिस्टम को प्रयास करने होंगे। मगर सबसे खतरनाक पहलु यह है कि आज जितनी संख्या कोरोना संक्रमितों की मौजूद है उसकी क्या गारंटी है कि वह अनजाने में ही संक्रमित होने के बाद या रिपोर्ट आने तक के इंतजार तक अगले कम से कम 5 लोगों के सम्पर्क में नहीं आये होंगे और उन 5 लोगों का क्या जिन्हें संदेह के दायरे मंे लिया है वो अगले 5 लोगों के संपर्क में नहीं आये है। अगर कोरोना संक्रमण के स्वभाव को जानने वालो की माने तो अनियंत्रित अनलाॅकडाउन ने लोगों के 3 महीने के संघर्ष का सत्यानाश कर दिया, अब इसके लिए दोषी करार स्वयं जनता, सिस्टम, शासन, सरकार जिसको भी दिया जाये। मगर समस्या तो अब सामने मुंह वाये खडी है। मगर लोग भी क्या करें जिन्होंने अपनी सुरक्षा और अनुशासन की बागडोर सिस्टम को सौंप निष्फिर्क हो जीवन निर्वहन में जुटे थे। मगर आज जो हालात है वह किसी भी स्थिति में मुफीद नहीं कहे जा सकते, फिर वह म.प्र. की राजधानी भोपाल आर्थिक राजधानी इन्दौर सहित ग्वालियर-चंबल जिले के कई जिले हो। सभी दूर संक्रमित मरीजों का निकलना जारी है। देखना होगा कि आम नागरिक किस तरह से स्वयं को सुरक्षित रख पाते है वह भी स्वयं को एक-दूसरे के संपर्क में आये बगैर और घरों में रहकर बराबर हाथ धोकर और मुंह पर मास्क का इस्तेमाल कर।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
ये सही है कि खबर सच हो या फिर झूठ किसी को कोई फर्क पडने वाला नहीं। क्योंकि वर्तमान हालातों को मद्देनजर कहा जा सकता है कि ऐसा राज और ऐसी आजादी शायद किसी देश-प्रदेश को मिली हो। कहते है कि जहां समझ समझाईस और जीवन निर्वहन के संस्कार निज स्वार्थो के आगे एक दूसरे से जुदा हो ऐसे में सत्यानाशी संस्कारों का प्रार्दुभाव होना स्वभाविक है। अगर 7 लाख के पार जा पहुंचे देश के आंकडे को अगर हम दरकिनार कर दें और म.प्र. के अन-उपलब्ध आंकडों पर चुप्पी साध लें, तो खुद के शहर का क्या करें जहां आये दिन निकलते संक्रमितों की संख्या ने कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज कर दी है। बढते आंकडो को देख भले ही एक मर्तवा फिर से लाॅकडाउन का सहारा सत्ताओं में और शासन ने लिया हो। मगर जो बिगाड खाता अनलाॅकडाउन के चलते हो चुका है उसके आंकडे जानने और भरपाई करने कम से कम अगर अगले दिन से एक भी मरीज नहीं मिलता है तो मौजूद आंकडों के साथ 7 दिन से लेकर 14 दिन तक तो कोरोना से मुक्ति के लिए इंतजार करना ही होगा। मगर लगता नहीं कि अगले 14 दिन तक एक भी संक्रमित न मिले। अगर संक्रमित मिलने का क्रम हर रोज जारी रहा है तो उसी क्रम में अगले 14 दिन तक संक्रमण रोकने सिस्टम को प्रयास करने होंगे। मगर सबसे खतरनाक पहलु यह है कि आज जितनी संख्या कोरोना संक्रमितों की मौजूद है उसकी क्या गारंटी है कि वह अनजाने में ही संक्रमित होने के बाद या रिपोर्ट आने तक के इंतजार तक अगले कम से कम 5 लोगों के सम्पर्क में नहीं आये होंगे और उन 5 लोगों का क्या जिन्हें संदेह के दायरे मंे लिया है वो अगले 5 लोगों के संपर्क में नहीं आये है। अगर कोरोना संक्रमण के स्वभाव को जानने वालो की माने तो अनियंत्रित अनलाॅकडाउन ने लोगों के 3 महीने के संघर्ष का सत्यानाश कर दिया, अब इसके लिए दोषी करार स्वयं जनता, सिस्टम, शासन, सरकार जिसको भी दिया जाये। मगर समस्या तो अब सामने मुंह वाये खडी है। मगर लोग भी क्या करें जिन्होंने अपनी सुरक्षा और अनुशासन की बागडोर सिस्टम को सौंप निष्फिर्क हो जीवन निर्वहन में जुटे थे। मगर आज जो हालात है वह किसी भी स्थिति में मुफीद नहीं कहे जा सकते, फिर वह म.प्र. की राजधानी भोपाल आर्थिक राजधानी इन्दौर सहित ग्वालियर-चंबल जिले के कई जिले हो। सभी दूर संक्रमित मरीजों का निकलना जारी है। देखना होगा कि आम नागरिक किस तरह से स्वयं को सुरक्षित रख पाते है वह भी स्वयं को एक-दूसरे के संपर्क में आये बगैर और घरों में रहकर बराबर हाथ धोकर और मुंह पर मास्क का इस्तेमाल कर।
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