राजधर्म के आभाव में बढता जीवन का संकट लापरवाही बनी दुश्मन
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से विश्व भर में कोरोना विस्फोट हुआ है उसके चलते संक्रमितों की संख्या एक करोड के पार है वहीं भारत में ही आंकडा दस लाख को छूने आतुर है, तो वहीं म.प्र. ने भी बीस हजार संक्रमितों का आंकडा पार कर लिया है। देखा जाए तो जिस तरह से ग्वालियर-चंबल ने संक्रमितों के मामले में रफ्तार पकडी उसमें खासकर शिवपुरी जिले में आये दिन संक्रमित निकलने की जो श्रृंखला शुरू हुई वह टूटने का नाम ही नहीं ले रही और कुछ ही दिन में संक्रमितों की संख्या 231 के करीब जा पहुंची, जो अब लोगों के लिए चिन्ता का विषय बन गया है। देखा जाए तो जिस तरह से रोजगार राशन पानी की सप्लाई से जान छुडाने अनियंत्रित तरीके से अन-लाॅकडाउन की शुरूआत हुई उसने सारी व्यवस्थाओं को धरासाई कर दिया। साथ ही उपचुनावों की आहट और जीत-हार के दांव में जुटे सियासी दलों की निर्भीकता ने भी आग में घी का ही काम किया। मगर कहते है कि विगत 70 वर्षो में प्रशासनिक दक्षता की जो परिपार्टी शुरू हुई वह थमने का नाम नहीं ले रही। वर्तमान समय में सच से मुंह छुपाने और सही समय पर सच न बोलने की जो आपराधिक प्रवृति बढी है वह मानवीय जीवन के लिए चिन्ता का विषय है। कहते है दुनिया में कभी कोई ऐसी समस्या नहीं रही जिसका न हो। बशर्ते इंसान के अंदर संकल्प शक्ति प्रबल होना चाहिए यहीं संकल्प शक्ति का आभाव आज मानव जीवन के लिए सबसे बडा संकट है। काश इस सच को लोग समझ पाये।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से विश्व भर में कोरोना विस्फोट हुआ है उसके चलते संक्रमितों की संख्या एक करोड के पार है वहीं भारत में ही आंकडा दस लाख को छूने आतुर है, तो वहीं म.प्र. ने भी बीस हजार संक्रमितों का आंकडा पार कर लिया है। देखा जाए तो जिस तरह से ग्वालियर-चंबल ने संक्रमितों के मामले में रफ्तार पकडी उसमें खासकर शिवपुरी जिले में आये दिन संक्रमित निकलने की जो श्रृंखला शुरू हुई वह टूटने का नाम ही नहीं ले रही और कुछ ही दिन में संक्रमितों की संख्या 231 के करीब जा पहुंची, जो अब लोगों के लिए चिन्ता का विषय बन गया है। देखा जाए तो जिस तरह से रोजगार राशन पानी की सप्लाई से जान छुडाने अनियंत्रित तरीके से अन-लाॅकडाउन की शुरूआत हुई उसने सारी व्यवस्थाओं को धरासाई कर दिया। साथ ही उपचुनावों की आहट और जीत-हार के दांव में जुटे सियासी दलों की निर्भीकता ने भी आग में घी का ही काम किया। मगर कहते है कि विगत 70 वर्षो में प्रशासनिक दक्षता की जो परिपार्टी शुरू हुई वह थमने का नाम नहीं ले रही। वर्तमान समय में सच से मुंह छुपाने और सही समय पर सच न बोलने की जो आपराधिक प्रवृति बढी है वह मानवीय जीवन के लिए चिन्ता का विषय है। कहते है दुनिया में कभी कोई ऐसी समस्या नहीं रही जिसका न हो। बशर्ते इंसान के अंदर संकल्प शक्ति प्रबल होना चाहिए यहीं संकल्प शक्ति का आभाव आज मानव जीवन के लिए सबसे बडा संकट है। काश इस सच को लोग समझ पाये।

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