वेखौफ कोरोना का खतरनाक मंजर अगर संख्या 28 लाख के पार है तो कैसे संम्हलेंगे नगर, महानगर

व्ही.एस.भुल्ले

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

जैसी कि संभावना संसाधन एवं समझ के आभाव में वलवती थी लगता है कि अब वह स्पष्ट और सत्य साकार होती नजर आती है। क्योंकि विगत कुछ दिनों में जिस तरह से कोरोना संक्रमण का दिन-दूनी, रात-चैगनी रफ्तार से बढ रहा है और धीरे-धीरे महानगर, नगर ही नहीं गांव, गली तक अपनी पहुंच बना रहा है वह अब किसी से छिपा नहीं। कागजी अश्वों से सजे रथ पर लहराती आदेश-निर्देषों की पताकाओं से साफ है कि अगर कोरोना की रफ्तार यही रही, तो अब उसे चक्रवती सम्राट बनने से कोई नहीं रोक सकता। क्योंकि कारगार दवा के आभाव में लोग जिस तरह से इस बीमारी से दो-चार हो रहे है उसके परिणाम यह स्पष्ट करने काफी है कि अगर सावधानी और स्वस्थ रहने की आदत अगर मानव जीवन में सुमार नहीं हुई तो समूचे मानव जगत को इसके घातक परिणाम भोगने ही होगें। क्योंकि अब न तो समझाने का समय शेष रहा और न ही समझ। ऐसे में सावधानी ही वह अचूक अस्त्र साबित हो सकता है जो मानव जीवन को इस कोरोना से बचा सकता है। 

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