समझ और शोषण पर उठते सवाल मैनेजरों के हांके से हाफनी भरते विधा, विद्ववान

वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जीवन विधा विद्ववान के हुनर और जीवन की रक्षा संरक्षण सम्वर्धन उन्हें समृद्ध बनाने में सत्ताओं का जनहित में बडा योगदान होता है। मगर सियासी मैनेजरों के इशारों पर नाचने वाली तथाकथित मीडिया मैनेजरों से जान बचाने सोशल मीडिया के अंधे कुऐं में कूंदती विधा, विद्ववानों की विधा उनके कीर्तिमान असुरिक्षत हो, जिन्दगी की खातिर लूट पर मजबूर होंगे ऐसा शायद ही किसी ने सपने में सोचा हो। सियासी मैनेजर आज ऐसी विधा, हुनर, ज्ञान का किसी संरक्षित पैमाने के आभाव में बेरहमी से लूट उस विधा को जो सर्वकल्याण में सहायक हो सकती थी उसे अंग-भंग कर स्व-स्वार्थ में नीलाम करने पर तुले है। सियासी गलियारों में विधा ज्ञान का बाजार जिस बीट बाजार के रूप में फल-फूल रहा है सोशल मीडिया में किसी से छिपा नहीं। मगर इस ज्ञान, विधा, विज्ञान की बौद्धिक लूट पर विद्ववानों की चुप्पी कितनी सार्थक, शर्मनाक है यह तो वहीं समझ सकते है। फिलहाल सवाल अनेक है मगर फिलहाल निदान शेष नहीं। देखना होगा कि और कितना समय कालखंड, विधा, ज्ञान के संघर्ष में नियति ने निर्धारित रख छोडा है। 

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