डेटा मठ पर वर्चुअल संतों का महाकुंभ गूगल गुरू का खेल खराब करते वर्चुअल महागुरू

व्ही.एस.भुल्ले

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

भैया- कंपनी बहादुर की पिच पर बोल्ड होने से बौखलायें म्हारे क्रिकेट विरोधी दुश्मन को राष्ट्रवादियों की एक ही गुगली से गिल्ली छोड क्रीनबोल्ड होने का सौभाग्य भले ही प्राप्त हो चुका हो, मगर जिस तरह से राजनैतिक सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक तौर पर बाउंसरे खुली पिच पर फैंकी गई है उन्होंने विश्व के बडे-बडे खिलाडी और दर्शकों के होसफागता कर दिये है। कंपनी बहादुर की बनी पिच पर वर्षो से धुंआधार बेटिंग करने वाले म्हारे पडोसी को यह मुगालता था कि डे-नाईट खेलने वाली भारतीय टीम बर्फीले मैदान पर उसकी तेज बाॅलों के आगे टिक नहीं पाऐगी। मगर जिस तरह से म्हारी टीम ने दोनों छोर के धुंआधार खेल का प्रदर्शन किया है और एक छोर चैके-छक्के, तो दूसरे छोर से बडे-बडे बाॅलरों को हताश-निराश किया है उससे क्रीनबोल्ड हुए पडोसी की बैवसी को समझा जा सकता है। भले ही हार से घबराई पडोसी टीम पूल की टीमों को भडकाने का स्वयं की हार के बाद अंतिम प्रयास में जुटी हो। मगर लगता नहीं कि कुटनी और डंडे से गांव, गली, मौहल्लों में क्रिकेट खेलने वाली टीम का कुछ बिगाडा है। मगर सबसे बडा संकट तो आजकल डेटा मठ पर भरे वर्चुअल महाकुंभ में सतसंग को लेकर है। ऐसे में म्हारे महान गूगल गुरू का खेल खराब करते वर्चुअल महागुरू अब तो सोशल मीडिया में धुंआधार खेलते नजर आवे। मने न लागे कि अब कोई नई टीम या नया खिलाडी इस वर्चुअल सतसंग से निकले खिलाडियों के सामने टिक पावे। मने तो लागे कि गर कोरोना का कहर इसी तरह चलता रहा, तो कई नेता और सियासी दलों का दीवाला सरेयाम निकलने वाला है। 

भैये- अरे बावले तने कै मायावी दल का गठन कर लिया शै, जो विदेश नीति से लेकर और देश की सियासी नीतियों पर बोल रिया शै। कै थारे को मालूम कोणी एल.ओसी से लेकर एल.एसी तक म्हारे अपने पडोसियों के साथ तनाव चल रिया शै और परोसी, साहूकार दौलत के बल पर हमारे अभिन्य पडोसियों को बरगला रिया शै और तने वर्चुअल कुंभ सतसंग सहित गूगल-गुरू वर्चुअल महागुरूओं की गुरमाला लें, खुद की पार्टी को सिद्ध करने में लगा शै। कै थारे को मालूम कोणी कंपनी बहादुर द्वारा 150 वर्ष पूर्व बनाई पिच पर म्हारा ही तो पडोसी खेल रिया शै और राजनीतिक, सामूहिक, आर्थिक, शैक्षणिक बल पर म्हारी खेल भावना के चलते म्हारी भावनाओं को कूट रिया शै। मगर भैया जिस तरह से इस मैच में म्हारे दोनों खिलाडी खेले है मने तो दिल बाग-बाग हो लिया शै। 

भैया- तो क्या म्हारे मायावी दल को पहले ही चांस में सफलता मिल जायेगी और म्हारी सरकार भी गांव, गली से लेकर म्हारे राज्य में बन जायेगी। 

भैये- अरे बावले इस पेंशन और सियासी टेंशन के दौर में थारी दाल नहीं गलने वाली। बेवजह गैंगबंद गिरोहबंद मायावी सियासत और वर्चुअल कुंभ में सजे सतसंग महागुरूओं की टोली में न तो थारे दल और न ही थारी दाल गलने वाली है। सरकार किसी की भी बने और किसी की भी बिगडे म्हारे जैसे नंगे-भूखों की किस्मत थोडी ही पलटने वाली है। 

भैया- तौ कै म्हारा लोकतंत्र यूं ही महान है जहां जनता भगवान, तो सरकार पुजारी नजर आती है यह सब झूठ है और सेवा और सेवक का जुमला भी सच्चाई से कोसो दूर है। गर अगर ऐसा है तो कंडे पडे म्हारे जैसे चिन्दी पन्नों वालो पर जिनके रहते म्हारे महान लोकतंत्र का सिंहासन ढोल रिया शै। शायद इसलिये काडू म्हारा चिन्दी पन्ना हाथ में लिये म्हारे को गूर रिया शै। 

भैये- मुंये चुपकर थारे जैसे देश भक्त पगलेट को ये सियासी सल्तनत और सत्ता की बात समझ न आने वाली। क्योंकि तंत्र जो भी हो सत्ता हमेशा से सियासी गुलाम रही है और अगर सत्ता कल्याणकारी सेवक है तो आमजन को समृद्धि खुशहाली मिली है और गर सत्ता स्वार्थवत स्वकल्याणकारी रही है ऐसी सियासत में आम गांव, गली, गरीब दरिद्रनारायण की बडी दुर्गति हुई है। इसलिये तने दल-बल, बाहुबल, सत्ता सियासत सबकुछ छोड और सेवा भाव में जुट जा, जगह जिस भी दल में मिलें पूरी बेशर्मी से फस जा, इतने पर तो थारे को कहीं का भी टिकट मिल, थारी काठी भी लोकतंत्र के महाकुंभ में स्नान कर तर जायेगी, नहीं तो इस भीड तंत्र में थारी काठी भी म्हारी तरह बेभाव ही धक्के खायेगी।

भैया- मने समझ लिया थारा इशारा, सैकडों वर्षो बाद लगता है म्हारे महान भूभाग पर राष्ट्र-जन की सेवा, सुरक्षा का सैलाब उमडा है। देश की सीमा ही नहीं, सीमा के बाहर भी सेवा का सैलाब जा पहुंचा है। मगर तने भी कान खोलकर सुन लें, मने सेवा की खातिर किसी की जूठन नहीं खाऊंगा और राष्ट्र-जन की खातिर सेवा कल्याण के लिए जरूर मायावी दल बनाऊंगा, जिससे वर्चुअल महागुरूओं की मंडली को मने भी राष्ट्र की खातिर सियासी टक्कर दे सकूं और हाथों-हाथ चुनाव में शामिल हो, गांव, गली, गरीब की खातिर अपने महान लोकतंत्र में सत्ता हासिल कर सकूं और सुपरसोनिक प्रकृति प्रदत्त कम्प्यूटर और डेटा को त्याग पपलू-पपलू नेट पर खेलने वाली अपनी उस पीढी को समझा सकूं कि आखिर तुम्हारा सामर्थ, पुरूषार्थ और पहचान कितनी महान है। 

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता