नये भारत को नई रणनीत की दरकार राष्ट्रीय डाटा संकलन को बनाना होगा समर्थ और समृद्ध सीमा से सटे राज्यों में करना होगा सुरक्षा का विस्तार

व्ही.एस.भुल्ले

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

बदलते भारत और आत्मनिर्भर भारत निर्माण के संकल्प के बीच सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि नये भारत निर्माण में जो रणनीत दीर्घगामी सिद्ध और समर्थ होगी उन विषयों पर गंभीरता से ही नहीं, व्यवहारिक तौर पर भी रणनीत को जमीनी स्तर पर लाना होगा। आज भारतवर्ष विश्व धरातल पर जिस भूमिका के लिए स्वयं को तैयार करने का संकल्प ले चुका है उसे समृद्ध और सार्थक करने में देश के नर्वस सिस्टम को दुरूस्त करना पहली प्राथमिकता होना चाहिए। जिस तरह से मौजूदा केन्द्र सरकार में शिक्षा नीति में परिवर्तन कर जो लंबी छलांग लगाने का खाका खींचा है अगर इसके साथ विभिन्न डाटा संकलन के लिए अगर राष्ट्रीय स्तर पर एक समृद्ध, समर्थ संस्था का टाॅप-टू वाॅटम निर्माण होता है, तो वह राष्ट्र निर्माण में दूर की कोणी साबित हो सकती है। इसके साथ ही जो सबसे अहम सवाल आज भारतवर्ष के सामने सुरक्षा को लेकर है उसके मद्देनजर सरकारों को अपनी सुरक्षा नीतियों की समीक्षा के साथ अंतराष्ट्रीय सीमाओं से लगे राज्यों में नये सिरे से सुरक्षा की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत अनुसार उनका विस्तार तथा व्यवहारिक जीवन से उसे जोडा जाना चाहिए यह सुखद बात है कि देश के प्रधानमंत्री ने अंतराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्य लेह से लेकर हिमाचल तक जो एक लाख एनसीसी कैडिट की बात की है यह दूरगामी सुरक्षा सोच का ही परिणाम है। मगर किसी भी राष्ट्र और राज्य के लिए सुरक्षा वह पहली शर्त होती है जिस पर किसी भी समृद्ध और खुशहाल राज्य का अस्तित्व निर्भर करता है। सत्तायें चाहे और उनकी सियासी बैवसियां न हो, तो आज भी भारत विश्व में जीवन निर्वहन के मामले में सबसे समर्थ और समृद्ध है जिसका हस्तक्षेप कई क्षेत्रों में अपना पुरूषार्थ सिद्ध करने में सक्षम है। मगर राष्ट्रीय नीतियों के एक रूपता के आभाव में कई सार्थक निर्णय सत्ताओं के वह प्रभावी छाप छोड लोगों को उसकी अनुभूति कराने में असमर्थ, असफल सिद्ध होते है। अगर सत्ताओं में समृद्ध सोच के साथ सामर्थ के सदपयोग और पुरूषार्थ के अवसरों का समन्वय ठीक हो, तो कम समय में ही भारतवर्ष शक्तिशाली ही नहीं, एक समृद्ध खुशहाल राष्ट्र के रूप में अपने आपको सिद्ध करने में समर्थ और सक्षम होगा। देखना होगा कि एक के बाद एक ऐतिहासिक निर्णयों और नई-नई शुरूआतों के लिए तत्पर सरकार कब कुछ अहम सवाल और उनसे जुडे लोगों का संज्ञान लेने में समर्थ और सक्षम बन पाती है। 

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