रोजगार की बाढ से थर्राये बेरोजगार
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
भले ही कोरोनाकाल का दौर हो और लोगों के आगे रोजी रोटी का संकट। मगर रोजगार की बाढ ने ऐसे हालात पैदा कर दिये है कि आंकडों में भले ही लाभांवित होने वालों की संख्या हजारों में हो और करोडो रूपया राज्य और केन्द्र शासन मुहैया करा चुका हो। मगर जिस तरह से लोग रोजगार के लिए भटकते नजर आते है उसे देखकर नहीं लगता कि रोजगार की पहल सार्थक होती दिख रही है। जिस तरह से मनरेगा में मजदूरी के अलावा प्राप्त आवंटन का बटिया बांट हुआ और उसको लेकर उठे सवालों पर जांच की गई भले ही उसमें दोषियों का आंकडा जो भी हो। मगर दोषियों के खिलाफ कारगार कार्यवाही का आभाव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं कोताही का काॅलम कत्र्तव्य निर्वहन के मार्ग में बाधा बना है जो बेरोजगारों के सामने ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आ रहा है। अब सच क्या है ये तो कर्ता-धर्ता ही जाने। मगर सवालों का क्या वह तो यक्ष बने ही रहते है।
Comments
Post a Comment