महान मायावी दल.........तीरंदाज ?
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
भैया- आंख लाल, मस्तिष्क पर त्रिपुंड, बिखरी जटा को लेकर तने कहां घूम रहा है, क्या नाथ धाम, वृन्दावन से लौट फुल रूप से बावला हो चुका है।
भैये- बावले, पागल, सिर्री हो म्हारे दुश्मन, मने तो बेवीनार कर सोशल मीडिया के महासागर में मंथन कर, महान मायावी दल का गठन पंजीयन कर अब चुनाव और हाथों-हाथ सरकारों की गठन की सोच रहा हूं। क्योंकि म्हारे को इशारा है कि वेघर घूमती म्हारी गौमाता, गौवंश को अब तो न्याय तभी मिल सकेगा जब म्हारा महान मायावी दल सत्ता में सत्तारूड हो सकेगा। जिसके लिए पहले मने बेवीनार से माहौल बनाऊंगा फिर बीसी और वीडियों-काॅल पर लोगों को अपनी बात समझाऊंगा, साथ ही सोशल मीडिया में करोडा वीवर बना पार्टी का खेल जमाऊंगा और सोशल मीडिया पर ही जमकर प्रचार चलाऊंगा। मगर यह तभी संभव है जब मैं सोशल मीडिया के समुद्र का सफल मंथन कर अमृत-अमृत म्हारे मायावी दल को और सोमरस औरों को पिला पाऊं। क्योंकि बैसे भी सियासी समुद्र में बडी-बडी भेल, क्रोकोडाइल, मगरमच्छ विषधरों का अम्बार भरा पडा है। छोटी-मोटी मछली, कीटपंतगे, हिरण, खरगोश, बंदर, पशुधनों का झुण्ड अभी भी बेचारा निढाल खडा है।
भैये- मगर तने तो थारी चुनाव चंदा पार्टी से जान छुडा गौवंश को उनका हक दिलाने धार्मिक यात्रा पर बाबा अमरनाथ के दरबार गया था और त्रिलोगी नाथ को भी वृन्दावन पहुंच सियासत की शिकायत करने गया था फिर थारे को इस धर्म यात्रा में यह ज्ञान-विज्ञान, गठन, विघटन का मौका किस महापुरूष के सानिध्य से मिला, तने तो म्हारे दिमाग में बसे महान चाणक्य के सूत्रों को भी चारों-खाने चित कर दिया।
भैया- तने मैकाले की मंडलियों से म्हारे महान सिद्ध तपस्वी, कर्मयोद्धा, त्यागी, महान आचार्य चाणक्य के सूत्र सिद्धान्तों की तुलना मत कर, कै थारे को मालूम कोणी थारे जैसे महान लोक और तंत्र में सेवा के नाम महापुरूषों की कृतज्ञता, त्याग, बलिदान का कै हाल हो रिया शै। आज जब म्हारे को सत्ता का मूलमंत्र मिला है तो थारा कलेजा क्यों फट रिया शै, कै मने म्हारा ज्ञान-विज्ञान थारे पर फोकट में ही लुटा दूं, जिससे तने सियासत सम्राटों से मिल सोशल मीडिया में सक्रिय लोगों की तरह तने भी ऐडा बन पेडा खाने में सफल सिद्ध हो जाये और म्हान मायावी दल सत्ता में काबिज होने से पहले ही चारों-खाने चित हो जाये। भाया मने जाडू कि आजकल सोशल मीडिया पर सियासी सम्राटों का बडा खेल चल रहा है जिसमें मीठा-मीठा गप-गप और कडवा-कडवा थू हो रहा है मने जाडू थारे जैसे उस्तादों को, सो मने नहीं कुछ चोटी का उगल-निगल उल्टी क्रिया करने वाला।
भैये- मने तो बोल्यू तने महान मायावी दल बनाने का सपना छोड और किसी दल के बंधन-गठबंधन में अपना हिसाब लगा लें, बरना थारी लाल आंखें त्रिपुंडी ही नहीं कोई भी टीका लगा लें, इस मौजूद सियासत में थारे और थारे मायावी दल को सत्ता तो दूर की कोणी सुई के बराबर भी सियासत में जगह नहीं मिलने वाली। क्यांेकि अब सियासत सेवा कल्याण और लाखों करोडों की नहीं अरबों-खरबों का खेल हो चुकी है और जनता जनार्दन अब आध्यात्म के जाल को काट अपनी महान सभ्यता को निगल नेट-गुरू के सानिध्य में सोशल मीडिया के पुष्पक्त रथ पर सवार हो चुकी है। जहां आनंद ही नहीं हाथों-हाथ परमानंद प्राप्त होता है और जिसमें सेवा कल्याण तो सेंकेंडों में प्राप्त होता है। क्या बडे, क्या छोटे, क्या मानव, क्या महामानव, क्या सेवक, क्या जनसेवक किलिक करते ही मय चित्र के हाथ जोड हाजिर हो जाते है और उनके चेले-छर्रे भी अंध भक्ति में बगैर गुण दोष जाने डूब नजर आते है। जिसमें सेवा कल्याण ही नहीं, सर्वकल्याण के दर्शन भी हाथों-हाथ हो जाते है इसलिये म्हारी मान और चुपचाप त्रिम्वकेश्वर के दर्शन करने महाराष्ट्र की ओर निकल जा और प्रभु के दर्शन कर महाराष्ट्र की सुप्रसिद्ध मायानगरी से ही कुछ सियासत से मायावी गुर सियासी तौर पर सीख आ, क्योंकि मायानगरी में सियासत के मंडलेश्वरों का कुंभ चल रहा है इतने पर तो थारी चल जायेगी, बरना हजारों सियासी दल लिस्टों में भरे पडे है थारी कब्र भी उन्हीं लिस्टों में कहीं न कहीं गठन से पूर्व खुदी नजर आयेगी।
भैया- मने समझ लिया थारा इशारा मगर मने तो म्हारे जन्म को मृत्यु से पूर्व अवश्य धन्य बनाने महान मायावी दल में ऐडी-चोटी का जोर लगा उसे धन्य बनाऊंगा। ये अलग बात है कि अभी तक तो म्हारी काठी भले कुछ न कर सकी हो, मगर म्हारे महान त्याग, तपस्वी, गौवंश को न्याय दिलाने मायावी सियासत में महान मायावी दल अवश्य बनाऊंगा और इस सियासत में सेवा कल्याण के नये-नये र्कीतिमान स्थापित कर धन्य हो जाऊंगा।
चल गया तो जादू
चूक गये तो मौत
जीवन का आधार है।
जय स्वराज

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