कत्र्तव्य, न्याय के समागम की साक्षी बनी आयोध्या संत सभा में साधूवाद के साक्षी बने प्रधानमंत्री सत्य निष्ठा के दर राजधर्म की धर्म-ध्वजा

व्ही.एस.भुल्ले

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

प्रभु राम की जन्मभूमि पर जो संदेश देश के प्रधानमंत्री ने समूचे मानव जगत को दिया वह सार्थक सफल होगा ऐसी आशा अपेक्षा हर मानव को रखनी चाहिए। जिसके लिए संत सभा में देश के प्रधानमंत्री साधूवाद के पात्र रहे। मगर सत्य शिरोमणी मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम की जन्मभूमि पर जो संदेश राजधर्म की ध्वजा पताका अपने संदेश के माध्यम फहरा, जो राजधर्म का पालन संत सभा के समक्ष हुआ उसे सत्य निष्ठा न्याय के समागम के साक्ष्य के रूप में ही जाना जायेगा। हजारों वर्ष बाद भी आज एक मर्तवा फिर से यह सिद्ध है कि आयोध्या भूमि पर आज भी प्रभु राजाराम और उनके अनन्य सेवक महाबली श्री हनुमान का ही राज चलता है जो प्रधानमंत्री के सम्बोधित संदेश से स्पष्ट है जिसमें सत्य की स्वीकार्यता, सर्वकल्याण का भाव और राजधर्म के निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। इस घटना से इतना तो स्पष्ट है कि नैसर्गिक स्वभाव और प्राकृतिक सिद्धान्त की स्पष्टता स्वतः ही स्पष्ट है जिसे चुनौती देना असंभव ही नहीं, नमुमकिन है। अपनों के बीच अपनों के लिए जनता जनार्दन की खातिर उनके उज्जवल भविष्य समृद्धि, खुशहाली की खातिर बगैर किसी भेदभाव के सत्य के पक्ष में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य और न्याय के लिए राजधर्म का पालन जो हुआ है वह प्रभु राम की इच्छा आर्शीवाद और जनता जनार्दन को एक सेवक के रूप में मानव धर्म की कृतज्ञता के साथ संदेश में स्पष्ट है। हम धन्य है जो हम प्रभु राम के संरक्षण और उनकी छत्र-छाया में मानव धर्म की रक्षा के लिए एक बडे सार्थी, सहयोगी, सहजन, प्रियजन के रूप में इस जीवन में मौजूद है। काश हम प्रभु राम के संदेश को हर मानव तथा जन-जन तक अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन से पहुंचाने में सफल सार्थक सिद्ध हो और मानव जगत के बीच उस सत्य का आभास करा पाये जिसे जीवन में खुशहाल, समृद्ध जीवन के रूप में माना जाता है, तो मानव जीवन के रूप में हमारी सबसे बडी उपलब्धि होगी। मगर यह तभी संभव है जब हम प्राकृतिक सिद्धान्त अनुरूप नैसर्गिक स्वभाव के तहत मानव कल्याण हेतु अपना-अपना निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कर पाये। 

जय स्वराज


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