गैंग गिरोहबंद सियासत में सिसकते यक्ष सवाल......तीरंदाज ? संस्कृति, संस्कार, समृद्ध, खुशहाल जीवन के मोहताज गांव, गली, गरीब के बीच, जय-जयकार
व्ही.एस.भुल्ले
भैया- कै तने भी अनुवांशिक सदस्यता या पूर्व में राष्ट्र-भक्ति की शिक्षा ले रखी है जो तने भी जिन्दा कौम में जन्म लेने के बाद सत्ता भोग सोशल मीडिया का हाथ छोड सत्ता के लिए सोशल और रासायनिक इंजीनियरिंग की प्रस्तुती कर जीवन मृत्यु के यक्ष सवाल को दरकिनार कर सत्ता झपट के खेल को वजन दे रहा है। तभी तो बोल्यू भाया कि आखिर तने म्हारे को क्यों चुनाव चन्दा पार्टी गठन की सीख उपचुनाव से पूर्व दे रहा है और म्हारे को रूमाल झपट केे बहाने सत्ता झपट के खेल से दूर कर रहा है। मैं जाडू जिस तरह से वर्चुअल बैठक और उडनखटोले की गनगनाहट के बीच डांटने-बांटने का खेल शुरू हुआ है। अगर भाषणों वीरों के कथन सही है तो सच में शरीफ सच्चा इंसान इस सियासत में कौन है।
भैये- मुये कंडे पडे थारी काठी पर जो तने श्राद्ध पक्ष में भी शुभ-शुभ बोलने के बजाये अशुभ बोल रिया शै। कै थारे को मालूम कोणी पिक्चर के धोनी, रानी लक्ष्मी सहित इनका झण्ड उठाने वालों का मायानगरी की महान भूमि पर क्या हो रहा है। किसी का घर बंगला, तो किसी का जमीर टूट रहा है, तो कोई ड्रगिस्ट साबित हो रहा है तो कोई गुरूर के चलते जान बचाने हुजूर में पहुंच रहा है। बरना चम्बल सिंध, कैन, वेतवा बेसन वालों का क्या यहीं हाल होता जो चुनावों के नाम पर हो रहा है। मैं तो बोल्यू तने सपने में भी न सोचा होगा कि इस उपचुनाव के महान मौके पर सत्ता रूमाल झपट के पटाखे श्राद्ध पक्ष में फूटेंगें और गांव, गली, गरीब को मिलने वाली बक्शीश के मौके पर थारे जैसे चुनाव चंदा पार्टी वालों के भी छक्के छूटेंगे, कै थारे को मालूम कोणी कि श्राद्ध पक्ष में कौऐ भी शांत रहते है और वर्ष भर के स्वादिष्ट भोजन की क्षतिपूर्ति श्राद्ध पक्ष में ही कर लेते है।
भैया- तो क्या मने भी गैंग, गिरोहबंद सियासत में सत्ता के लिए शामिल हो, अपना मानव धर्म गांव, गली, गरीब, गौवंश पर चुप्पी साध बटने वाली वक्शीश हासिल करने लाईन में लग जाऊं और पर्चा पढने की ट्रनिंग लें, मने भी धन्य हो जाऊं। मगर मने न लागे म्हारे जैसे मुंह फट की सत्ता झपट के खेल में गैंग गिरोहों के रहते दाल गल पायेगी और बगैर किसी चमत्कार के अब इस सियासत में गांव, गली, गरीब, गौवंश की पूछ-परख हो पायेगी।
भैये- मुये थारे को जो भी करना है सो कर, मगर म्हारे बैचारे मगज पर वेसुरे प्रहार मत कर, बैसे भी कोरोना महान के कहर के बीच म्हारे चिन्दी पन्ने की धज्जियां उड रही है कोरोना का खौप ऐसा कि म्हारी आने वाली पीढियां तक कांप रही है। कै थारे को मालूम कोणी हर रोज म्हारे देश में संक्रमितों की संख्या के नये-नये र्कीतिमान स्थापित कर रही है और आंकडे अब तो प्रतिदिन 90 हजार के पार हो रहे है। ऐसे में थारे को सत्ता, रूमाल झपट का खेल दिख रहा है जब समूचा मानव जगत ही कोरोना के सामने नाक रगडने मजबूर बैवस दिख रहा है, तो थारी और म्हारी विसात ही क्या।
भैया- मने समझ लिया थारा इशारा, मगर जरा प्रभु राम का दरबार तो सजने दें, पहली फुर्सत में सरयू तट तो बगैर विश्राम किये यमूना जी जाऊंगा और हाथों-हाथ म्हारे गौवंश, गांव, गली, गरीब का हाल बताऊंगा तथा गैंग गिरोहबंद सियासत को सबक सिखाने न्याय और सत्ता की खातिर गांव, गली, गौवंश, गरीब की खातिर गुहार लगाऊंगा, चल गया तो जादू, चूक गये तो मौत, मानव धर्म का सवाल है। जय-जय सियाराम
जय स्वराज

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