सृजन में सिद्ध होता सांस्कृतिक संवाद
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है जब कृतज्ञता सार्थक, संकल्प को अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन से कृतज्ञ करती है तो सृजन में सराहना होना स्वभाविक है। दौर 21वीं सदी का और जन्मदिन भी सार्थक सिद्ध, जिसकी सिद्धता, सार्थकता का अनुमान फिलहाल लगा पाना मौजूद हालातों में भले ही संभव न हो। मगर भविष्य, वर्तमान को जिस सुनहरे अक्षरों में रच इतिहास गढना चाहता है उसका गौरव, वैभव आने वाले समय में स्वतः सिद्ध होगा और आने वाली पीढियांे के लिए सार्थक भी। अगर यो कहें कि स्वर्णयमकाल की नींव की मजबूत शुरूआत इस महान भूभाग पर हो चुकी है तो किसी को अतिसंयोक्ति नहीं होना चाहिए। जिस वैभवपूर्ण व्यक्तित्व के साथ सार्थक, सांस्कृतिक संवाद और समाधान की हल्की-सी झलक जनमानस ने विगत कुछ वर्षो में देखी है उसे देखकर मानव धर्म में आस्था रखने वालों में विश्वास अवश्य होना चाहिए। शुभकामनाऐं बधाई जय स्वराज

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