लायक, नालायक की जंग में उछलते यक्ष सवाल जन अदालत में होगा फैसला क्या जनता की अदालत में आमजन से मिलेगा, न्याय

वीरेन्द्र शर्मा

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

टी.व्ही, अखबार, मीडिया से इतर धन, संसाधनों के बल सोशल में मीडिया में कूद दलो के घोषित-अघोषित समर्थकों और स्वयं नेताओं के बीच छिडी आरोप-प्रत्यारोप सियासी जंग पर संज्ञान ले, तो पीडित, वंचित, आभावग्रस्त, बेरोजगार, किसान, टेक्सपेयर के भाग्य से ही सही, इस उपचुनाव में सवाल अवश्य यक्ष होने वाले है। एक ओर सत्ता से बेदखल दल है, तो दूसरी ओर उन्हें बेदखल कर सत्ता हासिल करने वाले लोग। ऐसे में जन अदालत में सियासी दलों के अलावा कुछ जनहित याचिकाओं के सवाल भी इस न्याय की घडी में सम्मिलित होना शेष है। ऐसे में तमाम गवाह, दलील, सबूत, प्रमाण पश्चात फैसला तो जन अदालत को ही इस उपचुनाव में करना है। 18 माह सेें न्याय के लिए कलफते, बिलखते लोगों की याचिकाऐं भी इस सुनवाई में सम्मिलित हो जाती है, तो इस चुनाव में एक बडे न्याय की उम्मीद होना स्वभाविक है। बहरहाल हम मूल मुद्दें पर आते है। नालायक और लायक, गद्दार, बफादार, विकास और विनाश, ईमान और भ्रष्टाचार, नैतिक और अनैतिक, अली बाबा, चोर और 40 चोर माफिया और बंटाढार जैसे जुमले इस उपचुनाव में अपुष्ट तौर पर उछलना स्वभाविक है। जीत हासिल करने सोशल मीडिया में उछलते यह मुद्दे खुलेयाम मंच और सडकों पर लगते आरोप-प्रत्यारोप बहस, प्रमाण और दलील, साथ ही जाति वर्गो को लेकर अपना-अपना मजबूत पक्ष रखने का जन अदालत में जो दौर शुरू हुआ है वह फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस सबके बीच जिस तरह से 24 घंटे सोशल मीडिया में बहस छिडी है और परतदर-परत आरोप और दलीलों की झडी लगी है, वहीं न्याय की बांट जोहती जनहित वाली अर्जियां भी सोशल मीडिया के माध्यम से उछल रही है। अगर जिसमें समय, संसाधन, स्वार्थ आडे नहीं आये तो निश्चित ही जन अदालत से आने वाला फैसला चैकाने वाला ही नहीं, धमाकेदार होगा। अगर ऐसे में अच्छे-अच्छों के चूले हिल जाये तो किसी को अतिसंयोक्ति नहीं होना चाहिए। मगर जिस तरह से सियासी कट-पुतलियों के माध्यम से उस्तादों के इशारों पर दलील दावे चल रहे है उससे मिलने वाले न्याय में कब अनिष्ठ की संभावना बलवती होने लगे फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। ये अलग बात है कि वर्तमान मुख्यमंत्री की दलीलें लायक, नालायक प्रकरण में काफी प्रभावी है, तो वहीं बफादार, गद्दार प्रकरण में एक मंत्री की दलील ने आरोप लगाने वालों का गला सुखा दिया है, तो वहीं बंटाढार पर सडक पर दलील देते लोग तो माफिया, भ्रष्टाचार पर भी मंचों से दलीलें आ रही है। तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री की अनकही दलीलें भी प्रभावी दर्द को दलीलों के माध्यम से छूने में कुछ कम नहीं, तो जनहित की अर्जियों में भी फिलहाल अली बाबा 40 चोर का प्रकरण सुनवाई के दौरान खासी सुर्खियां बटौर कोहराम मचाने की तैयारी में जुटा है। फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप के बीच उपचुनाव से पूर्व जनता की अदालत में जिरेह जबरदस्त है। देखना होगा उपचुनाव में फैसला किसके पक्ष में रहता है। 

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