शिवराज, सिंधिया जी को भी झूठ बोलना सिखा रहे है: कमलनाथ

वीरेन्द्र शर्मा

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

जोर देकर कैमरे के सामने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकारना कि शिवराज सिंधिया को झूठ बोलना सिखा रहे है। क्योंकि शिवराज सिंह भी 15 वर्ष के झूठ से अभी तक कोई सबक नहीं लिया। इसके सियासी मायने सियासी रण में सियासी हो सकते है। मगर जो हीलिंग टच दी गई है उससे इतना तो स्पष्ट है कि उनके इस सहदृयी समझ और बयानों के पीछे का सच भले ही सियासी तौर पर सिंधिया को निशाने पर न लें, आम जनता की सिमपैथी बटोरना हो सकता है, तो वहीं दूसरी ओर यह भी सच हो सकता है कि वह आगे के लिए सियासी रास्ता उतना तंग नहीं रखना चाहते कि सियासी तौर पर सियासत में कोई रास्ता ही शेष न रह जाये। अब इसके पीछे का सच तो कमलनाथ ही जाने। मगर जिस दलील के साथ उन्होंने शिवराज और उनके मंत्री मंडल के सदस्यों के झूठ पर प्रकाश डाला है वह उनके आंकडे अनुसार स्वतः सिद्ध है जिसमें उन्होंने बताया कि जिन कृषकों के ऋण माफी का वायदा कांग्रेस से किया था उसे हमारी सरकार ने तीन चरणों में पूर्ण करने वाली थी जिसमें हमारी सरकार को कुल आवेदन प्राप्त 50 लाख थे इसमें हमें पात्र कृषकों का ऋण माफ करना था और ऋण माफी का आखरी चरण चल रहा था। मगर इससे पूर्व सरकार गिरा दी गई। विधानसभा में स्वयं वर्तमान भाजपा सरकार के मंत्री ने स्वीकार्य किया है कि अभी तक 27 लाख किसानों का कर्जा माफ किया गया है जो अपने-आप में एक सत्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। बहरहाल जिस शैली में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान सरकार और उनके सहयोगियों पर हमलावर है वह निश्चित ही उपचुनाव के मद्देनजर दूरगामी रणनीत का ही परिणाम कहा जा सकता है। मगर इस उपचुनाव से पूर्व जिस तरह की सियासी जंग का आगाज भाजपा और कांग्रेस की ओर से हुआ है उसके मद्देनजर यह स्पष्ट है कि यह चुनाव इतना आसान और जीत किसी को भी सडक पर खडे होकर नहीं मिलने वाली, न ही जनता के बीच जनहित से इतर मुद्दों पर चल रही बहस से जनता भ्रमित होने वाली है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस यह अच्छी तरह जानती है कि सिंधिया के गढ में सिंधिया को भला-बुरा कहने से कांग्रेस की साख नहीं बढने वाली, न ही चुनावी लाभ उसे मिलने वाला है। शायद इसी रणनीत के तहत म.प्र. के कांग्रेस आलाकमान के सुर संस्कारिक और सियासी नजर आते है। अब यह तो यक्ष सवालों के बीच हार-जीत का गणित ही तय करेगा कि जनता किसको जिताती है और किसको हराती है फिलहाल तो हार-जीत का गणित भविष्य के गर्भ में है।  

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