संबिधान दिवस, 71 बर्ष बाद भी सांसत में समृद्ध, खुशहाॅल जीवन
निष्ठा पर भारी , बिमुखता, कृतज्ञता रही कंगाल
व्ही. एस. भुल्लेम.प्र.- विलेज टाइम्स समाचार सेवा
म.प्र.- कहते है मनाव कल्याण में बिद्या,स्वास्थ संस्कारो का बड़ा योगदान होता है जो मानव जीवन को मजबूत आधार उपलब्ध करा उसे समृद्ध खुशहाॅल बनाने मे सहायक सिद्ध होते है। संबिधान के प्रमुख पृष्ठो पर भगवान राम,कृष्ण के चित्रो का होना इस बात का प्रमाण है कि 26नबम्बंर 1949 को तैयार विधिसम्बत इस विधान मे मानव ही नही समस्त जीव जगत के कल्याण उनकी समृद्धि खुशहाॅली की पूरी चिन्ता की गई है। मगर क्या हम उस उदेश्य मे सफल हो सके यही आज सबसे बड़ी समझने बाली बात सभी के लिये होना चाहिए। सो प्रभु राम जैसा राज और कृष्ण की द्वारका जैसै संस्कार कहा से लाये जिन्ह पाकर सुदामा धन्य हो गये हो सकता है इसे पढ़कर लोग इसे अध्यात्म की संज्ञा दे और शायद यही कारण है कि हम समृद्धि खुशहाॅली के नाम कंगाल हो चुके है। प्रमाण स्पष्ट कि जिस तरह से स्वास्थ, शिक्षा के बड़े बड़े बाजार और शुद्ध पेयजल के बाजार पनप रहै है इसे हम मानव जीवन की सफलता नही कह सकते न ही इसे 71 बर्षो कि निष्ठा का परिणाम कही तो हमारे कर्तव्य निर्वहन मे चूक हुई है जिसके दुस्परिणाम आज सारा कुछ होने बाबजूद भी मानव जीवन भोगने पर मजबूर है कास इस सत्य को निष्ठा मे लीन वह कर्तव्य निष्ठ भी समझ पाये जिससे मानव जीवन को सार्थक समाधान निदान मे मिल सके जय स्वराज ।

Comments
Post a Comment