राष्ट्र्भक्ति,स्वाभिमान,सर्मपण,आत्मसम्मान की सीख रानी लक्ष्मीबाई,स्व.इन्दिरा गाॅधी से तो सृजन लोक कल्याण में सार्थक सामर्थ पुरूर्षाथ सिद्ध करने की सीख श्रीमंत माद्यौ महाराज से लेनी चाहिए निष्ठापूर्ण कृतज्ञता जीवन में कभी कंगाल नही होती न ही उसकी समृद्धि कभी समाप्त होती

वीरेन्द्र भुल्ले

म.प्र.-विलेज टाइम्स समाचार सेवा

कहते है कि सृजन लोक कल्याण में किया गया निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन उसकी कृतज्ञता न तो कभी बाॅझ रहती न ही कंगाल होती बल्कि उसकी विरासत जीवन में हमेशा समृद्ध बनी रहती है और उस कृतज्ञता को लोंग अनंत काल तक स्वाभिमान सम्मान के साथ याद करते है राष्ट्र्जन की खातिर शहीद रानी लक्ष्मीबाई,स्व. इन्दिरा जी की
कृतज्ञता समर्पण आज राष्ट्र्जन से छिपा नही न ही श्रीमंत माद्यौ महाराज की कृतज्ञता किसी से छिपी है जिस तरह रानी लक्ष्मीबाई और स्व. इन्दिरा जी राष्ट्र्जन की खातिर अपने प्राणो की अहूती देने मे संकोच नही किया उसी तरह एक राज के मुखिया होने के नाते लोक, जन कल्याण और समृद्ध संस्कारो की स्थापना में अपने जीवन काल के हर उस अमूल्य क्षण की आहूति दी जो राजसी जीवन मे दूर की कोणी माना जाता है स्वयं के राज्य जन की समृद्धि खुशहाॅली के लिये हर गाॅब मे 2-2 तालाब सिन्ध,पार्वती के जल के उपभोग हेतु तिघरा,हर्षी,ककेटो मणीखेड़ा,मोहनी बाॅधो सर्वे विश्वविख्यात ईन्जीनियरिग के भगवान कहै जाने बाले सर मोक्षगुन्डम बिश्बैसरैया जी से कराना जिसमे तिघरा हर्षी का निर्माण और ग्वालियर से दूर पठारी क्षैत्र मे सर्वसुविधायुक्त वातानुकूलित शहर शिवपुरी को बसाना 18 तालाब रेल दूरसंचार,सुन्दर सड़के रिग रोड ,होटल,वृहत सचिवालय,महल,क्लव,सांस्कृतिक भवन,खेल मैदान,सुन्दर चैराहै,सीवर लाइन,नेशनलपार्क,स्कूल,मण्डी, बाजार,शहर के अन्दर साफ जल की नहरे पुल पुलिया इस शहर को वह आधुनिक सुबिधा मौजूद थी जो आज लोगो को मयस्सर नही इन सबसे अहम था उनके द्वारा अपनी माॅ के सम्मान मे स्थापित वह संस्कार जिसके चलते वह एक राज्य प्रमुख अर्थात राजा महाराजा होने बाबजूद भी बर्ष मे एक बार नंगे पैर अपनी माॅ की प्रतिमा को रथ मे बैठाल रथ को स्वयं खीच नगर भ्रमण कराते थे इन महान विभूतियो की जयंती पर सृजन मान,सम्मान,स्वाभिमान सर्वकल्याण मे आस्था रखने बालो को उनके जीवन की कृतज्ञता से अवश्य सीख लेना चाहिए 

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