अनैतिक गठजोड़ के आगे गिड़गिड़ाता आत्म निर्भर का तोड़
अगर आकड़े दुरूस्त है तो अंजाम से अनभिज्ञ रहना, अन्याय
व्ही. एस. भुल्ले
म.प्र.- विलेज टाईम्स समाचार सेवा
म.प्र.- अगर आकड़े दुरूस्त और खबरो मे अनैतिक गठजोड़ पर सबाल है तो निश्चित ही समस्या विकट है मगर इसका समाधान न हो यह भी सम्भव नही, ये अलग बात है कि कुछ मौजूद सत्ताये इस अनैतिक गठजोड़ का सामना पूरी दृढ़ता से कर उसका सार्थक समाधान खोजने मे लगी है मगर लगता नही कि इतनी जल्द कोई सार्थक समाधान मिलने बाला है। सेवा कल्याण की आढ़ मे आधार मजबूत गठजोड़ को आज की भाषा मे यू तो उसे माफिया राज कहते है। जिसमे स्वार्थ सामर्थ पूर्ति के लिये बैद्य अबैद्य महात्वकांक्षाये अघोषित रूप से इक ही मंच पर नजर आती है। जबकि उनके बैद्यानिक दायित्व विधि अनुसार अलग अलग दायित्व बौझ से बंधे रहते है। मगर कर्तव्य विमुख कुछ लोग आज कर्तव्य पथ पर इसे अपना अधिकार समझते है जो आत्मनिर्भरता के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। निश्चित ही सेवाकल्याण के पथ पर विधायिका,कार्यपालिका का आचरण निशकंटक और कर्तव्य के प्रति निष्ठ माना जो उसके अस्तित्व की नैसर्गिक पहचान भी होती है। मगर निष्ठा की अनुभूति प्रमाणिक न हो तो उसके अस्तित्व पर सवाल होना स्वभाविक है जो किसी भी व्यवस्था मे शर्मनाक ही कहा जाता है इन घटनाक्रमो से अनभिज्ञ रहना उनके प्रति अन्याय होता जिनके कल्याण के लिये वह अस्तित्व मे होते है। फिर क्षैत्र जो भी हो सेवा कल्याण विकास हो या फिर मौजूद संसाधन,संपदा हो। अगर समृद्ध खुशहाॅल जीवन के लिये आत्मनिर्भरता समृद्ध मार्ग है तो यह तभी सम्भव है जब अबैध गठजोड़ को बैरहमी से तोड़ हर नागरिक अपना अपना निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन का मार्ग निष्ठा के साथ पृस्थ करे।
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