बैकाबू सेवाकल्याण संस्कारो की जकड़ में समृद्ध जीवन

त्याग के नाम बाॅझ हुआ सर्बकल्याण 

व्ही. एस. भुल्ले

म.प्र.-विलेज टाइम्स समाचार सेवा

म.प्र.-त्याग के नाम आज जिस तरह सेवाकल्याण बाॅझ नजर आता है और बैकाबू सेवाकल्याण की जिस तरह से बाछे खिली नजर आती है उससे साफ है कि किस तरह से समृद्ध जीवन मौजूद संस्कारो की जकड़ मे समाता जा रहा है और आम खुशहाॅल जीवन खुशहाॅली का मोहताज होता जा रहा है कारण जिस तरह से आम जीवन बिद्या को त्याग शिक्षा की छत्रछाया में 150 बर्षो मे फलाफूला है और मौजूद समाज ने उसे समृद्ध जीवन की खातिर आत्मसात कर अंगीकार किया है उसी का परिणाम है कि आज सर्वकल्याण और जीवन मूल्यो से जुड़े संस्कार त्याग के नाम बाॅझ नजर आते है अब ऐसे मे कैसै हो सेवाकल्याण तथा सर्वकल्याण यह यक्ष सवाल हर समझदार विवेक को कचोटता रहता है मगर ऐसा नही कि समाधान न हो मगर शुरूआत कैसै हो यही आज सभी को समझने बाली बात होना चाहिए।क्योकि समृद्धि, संस्कार त्याग तपस्या और उच्च जीवन मूल्यो के मोहताज होते है।जय स्वराज 


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