सृजन मे निष्ठ कर्तव्य, निस्वार्थ त्याग की श्रेष्ठता सिद्ध है तो श्रेष्ठ, व राष्ट्र्जनो को बगैर अवसर गबाये अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहिए। असंबाद बाॅधा का बिकल्प नही हो सकता संवाद से ही समाधान सार्थक होता है

व्ही.एस.भुल्ले

म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

म.प्र.-सृष्टि सृजन मे निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन निस्वार्थ त्याग की ही सिद्धता श्रेष्ठ रही है इसलिए बगैर समय गबाये श्रेष्ठजनो
और राष्ट्र्जन सहित पुरूषार्थी सामर्थशालियो सत्ताओ को अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहिए। यह तब की स्थति में और अवश्यक हो जाता है जब सर्बकल्याण और पुनः राष्ट्र्निर्माण का कार्य दुत्र गति से चल रहा हो ये सही कि लोकतांत्रिक बाध्यताये हमारे आड़े आ सकती है जैसै उत्तरी भारत का मौजूद किसान आन्दोलन जो दिल्ली की जिद पर है 

बिशुद्ध रूप से यह असंवाद का मामला है। निश्चित ही यह छोटे बड़े किसानों के हित से जुड़ा है। जिसका सहज समाधान न हो यह आज की सत्ता में संभव नहीं। क्योंकि मौजूद सत्ता का भाव सर्वकल्याण का है। जिसे हर नागरिक को याद रखना चाहिए और सत्ता को भी चाहिए कि वह बड़े किसानों के हितों के साथ छोटे किसानों के संरक्षण का मार्ग सुनिश्चित करें और यह संभव है जो दिनों में नहीं घण्टांे में सुलटाया जा सकता है। आज के समय सभी के लिए यह समझने वाली बात होना चाहिए। क्योंकि सार्थक नेतृत्व के सफल अवसर को गंवाना न तो सृष्टि, सृजन के हित में न ही त्यागपूर्ण निष्ठापूर्ण कत्र्तव्यनिर्वहन करने वाले उन नागरिकों के हित में है जिनके कल्याण के लिए सत्ता का आधार होता है। 

जय स्वराज 


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