अक्स,अनुभूति,का अभाव और मदमस्त अंहकार कही ले न डूबे सर्बकल्याण असंबाद के गर्भ में फलता फूलता बैलगाम आक्रोश गैंग,गिरोहबन्द संस्कृति में असंम्भव है सेवाकल्याण


व्ही. एस. भुल्ले

म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा 



म.प्र.-कहते है जिस तरह से अक्स के अभाव लोंग दिशा भटक जाते है ठीक उसी प्रकार कोई भी ब्यबस्था अपने लक्ष्य को खो परिणामो से बचित रह जाती है और वह एक ऐसे असफल स्मारक के रूप मे जानी जाती है जिसे आने बाली पीढ़ियाॅ भी स्वीकारने में संकोच खाती है मगर गरीब अभावग्रस्त जन, राष्ट्र् के बीच जिस तरह से गैंग,गिरोह संस्कृति के बीच सेवा कल्याण सर्वकल्याण की इबारत अक्स अनुभूति के अभाव , और मदमस्त अहंकार के बीच लिखी जा रही है उससे गर्भ मे पलते आक्रोश से कही सर्बकल्याण की बाॅठ जोहता समृद्ध जीवन स्वाहा न हो जाये क्योकि जिस तरह से काॅर्पोरेट कल्चर सत्ता संचालन में अपनी गहरी पैठ जमा चुका है और जिस असंवाद का माहौल सत्ताओ के बीच स्थापित हो चुका वह किसी से छिपा नही , जीवन मूल्यो की चिता सत्ता कि रोटी सेकने बाली सियासत को शायद यह इल्म नही कि जिनके समृद्ध खुशहाॅल जीवन के लिये सत्ता का आधार सियासत बनी आज उनका जीवन सिर्फ अभावग्रस्त ही नही कंटक पूर्ण होता जा रहा है कारण प्रमाणिक परिणामो का अभाव उस अनुभूति का अभाव जिसकी अपेक्षा उसे अपना मत वोट देते बक्त अपने जनप्रतिनिधि से या उन सरकारो से होती है जिनका कत्र्तव्य ,धर्म उन आशा अकाक्षाओ की पूर्ति होता है। मगर दुर्भाग्य की हमारी सत्ताये न 150 बर्षो मे स्थापित उस सढ़े सिस्टम को बदल पायी न ही उसे दुरूस्त कर पायी अगर इस सढ़े सिस्टम से किसी को सर्बकल्याण की उम्मीद है तो 21बी सदी का इससे बड़ा और कोई झूठ हो नही सकता अगर हम बात म.प्र. की करे तो यहाॅ एक ही दल की सत्ता 16बाॅ बर्ष चल रहा है सिस्टम आज भी वही का वही है क्योकि सत्ता को वोटो कि तो सिस्टम जीवन श्रेष्ठ बनाने की चिन्ता सताती रहती है। वही गैंग गिरोहबन्द काॅर्पोरेट कल्चर अपना अपना नफा नुकसान देख सेवाकल्याण के महल खड़े करने मे जीजान से दिन रात जुटे रहते है अब ऐसे मे कैसै हो सेवा कल्याण और सर्बकल्याण यही आज सबसे बड़ी समझने बाली बात होना चाहिए। जय स्वराज 

 


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