सृष्टि के विरूद्ध संस्कारो शंखनाद, सर्बनाश के संकेत सृजन में उर्जा का सार्थक निस्पादन ही जीवन की श्रेष्ठतम कृति है

व्ही.एस. भुल्ले

म.प्र.विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

म.प्र.-कहते हेै कि कोई सत्य से कितना ही मुॅह क्यो न मोड़े मगर सत्य, सत्य होता है और सत्य यह है कि सृजन मे उर्जा का सार्थक निस्पादन
को ही किसी भी जीवन की श्रेष्ठतम कृति माना गया है मगर आज जिस तरह से सृष्टि के विरूद्ध संस्कारो का शंखनाद मानव जगत मे चल रहा है सृजन के नाम वह किसी से छिपा नही जबकि जानकार जानने बाले यह भली भाॅती जानते है कि उर्जा कह अंश चाहै सूरज की किरण,जल,वायु, मानव,समस्त जीव जगत के किसी भी अंश फिर यंत्र मे हो अगर उपयोगिता पश्चात उसका निस्पादन सार्थक नही रहा तो वही उर्जा विनाश का कारण सिद्ध होती है यह बात समुचे मानव जगत को नही भूलना चाहिए आज जो लोग जन्म मृत्यु, दिन रात , जहर औषद्यि भोजन पानी अर्थात उर्जा श्रोत उसके सार्थक निस्पादन पर अहंकार बस अटठाहस करते है वह सिर्फ सृष्ठि सृजन ही नही बल्कि समुचे मानव ,जीव जगत सहित स्वयं के साथ भी धोखा करते है जो मानव धर्म के भी विरूद्ध है कहते है सृष्टि सृजन मे मानव सृष्टि की अनमोल कृति है अगर ऐसे मे मानव ही अपने मूल आधार से संघर्ष करता नजर आये तो फिर उम्मीद किससे की जा सकती है काश मानव के रूप मे सृजन मे श्रेष्ठ जीव की पहचान रखने बाले इस सत्य को समय रहते समझ पाये तो यह मानव के रूप हमारी आने बाली पीढ़ियो के लिये सृष्टि अनुरूप निष्ठापूर्ण कृतज्ञता होगी और आने बाली हमारी नस्ले हमारी इस कृतज्ञता पर गर्व कर स्वयं गौरान्वित मेहसूस करेगी।

जय स्वराज 

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