मर्यादा तोड़ता अहंकार, स्वस्वार्थ में डूबी महात्वकांक्षाये कही न करदे समृद्ध जीवन का बंटाढार खुशहाॅल जीवन को विश्वास की दरकार


व्ही.एस.भुल्ले

विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

म.प्र.- जिस तरह के हालात समृद्ध खुशहाॅल जीवन को लेकर अहम अहंकार और स्वस्वार्थ में डूबी महात्वकांक्षाओ के चलते बनते जा रहै है ऐसे मे समझ रखने बाले आम नागरिक से लेकर सत्ता सियासत श्रेष्ठ जनो के मन मे विश्वास को लेकर सबाल उठना स्वभाविक है कि कही ये हालात सृजन मे समृद्ध जीवन का बंटाढार ही न कर दे नही तो हमारे पूर्वजो की त्याग तपस्या ही नही उनकी अनगिनत कुर्बानी और पुण्याई कही बैभाव ही बरबाद न हो जाये और उनकी वह पीढ़ी जिस पर उन्हे नाज था वह अपने ही कृत्यो से मौजूद या आने बाली पीढ़ी के आगे कलंकित न हो जाये हो सकता है कि आज के जीवन मे इस संभावना का कोई मूल्य न हो मगर चर्चा संबाद मे हर्ज ही क्या ? ये अलग बात है कि तत्समय मौजूद उपनिवेशी शिक्षा, सदभाव समभाव, सर्बकल्याण, जीवन स्तर मे सुधार और तेजी से विकास को तत्पर सियासत सत्ता कि त्रुटियो के चलते स्वार्थ भरे उन टेडे़ मेड़े रास्तो को तय करते आज यहां तक पहुॅचे है इस सफर मे हमने एक दूसरे को जी भर के कोसा भी है और सराहा भी है और एक दूसरे की मदद की और ली है फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अब हम न तो एक दूसरे संबाद करना चाहते है न ही एक दूसरे कि सुनना चाहते है यही आज सबसे बड़ा चिन्ता का बिषय है विश्वास के अभाव अविश्वास की इतनी बढ़ी खाई आखिर कब तैयार हो ली किसी को पता ही नही चला और बसुदैबकुटुम्बकम का नारा विश्व को देने बाले हम स्वयं ही समृद्धि खुशहाॅली की फसल काटने से पूर्व ही तारतार हो चले। अब विचार हमे करना है अपने लिये न सही अपने अपने आने बाले या मौजूद पीढ़ी मानवता की खातिर करना चाहिए आज और अभी के लिये मानव होने के नाते हमारी यही सबसे बड़ी उपलब्धि होगी । जय स्वराज 


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