समाधान की मोहताज, सत्यनिष्ठा स्वार्थवत सियासत, समाज का समृद्धि के नाम बांझ होना, स्वभाविक घटना

 समाधान की मोहताज, सत्यनिष्ठा 

स्वार्थवत सियासत, समाज का समृद्धि के नाम बांझ होना, स्वभाविक घटना

व्ही. एस. भुल्ले


म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार

कहते है समृद्धि हमेशा सर्बकल्याण की मोहताज रही है और स्वार्थवत भाव बांझ होने का प्रमाण फिर वह सियासत हो या सामाजिक सरोकार जीवन को निर्वहन अनादिकाल से बाधित करने बाला यह भाव भले मानव को सुखदायी रहा हो मगर यह हमेशा समृद्धि के नाम बांझ ही रहा मगर मानव जीवन का अचूक अस्त्र बनता स्वार्थ न तो तब राष्ट्र् जन हित कर सका न ही भबिष्य मे भी ऐसा कुछ करने बाला है जिस पर मानव जाति स्वयं पर गर्व कर स्वयं को गौरान्वित मेहसूस कर सके फिर भी मानव जीवन मे इस दौड़ को हारना नही चाहता और अपने समुचे सामर्थ पुरूषार्थ को सृजन के बजाय स्वस्वार्थ मे फूक देना चाहता है परिणाम कि समाधान की मोहताज सत्यनिष्ठा समृद्धि के नाम बांझ साबित हो रही है जो आज सबसे बड़ी समझने बाली बात होना चाहिए कहते है समाधान के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा असंबाद या सम्पर्क विहीन होना है दोनो ही स्थति ठीक नही काश सत्य निष्ठा की सार्वजनिक सफत लेने बाला मानव इस सत्य को स्वीकार पाये तो यह मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। 


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