सूत की डोर पर डोलता समाधान,विश्वास हुआ बैहाल

जीवन में अनुभूति का अभाव कही, खुशहाॅल, समृद्ध जीवन का काल न बन जाये 


व्ही. एस. भुल्ले 


म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा

जिस सामर्थ पुरूषार्थ के साथ केन्द्र की सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार अपने अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का प्रदर्शन कर रही है वह किसी भी लोकतांत्रिक ब्यबस्था के लिये अनुकरणीय हो सकता है मगर जिस मझधार मे आज केन्द्र सरकार दिखाई दे रही है वह भी किसी बड़े सबाल से कम नही क्योकि जिस तरह से किसान और सरकार के बीच अड़ीपूर्ण संवाद चल रहा है और देश स्थाई समाधान की उम्मीद मे वह कैसै संभव होगा यह देखने बाली बात होगी जबकि किसान सरकार के बीच उलझे बिबाद को एक माह पूरा होने को है और समाधान आज भी कोसो दूर ऐसे मे कही न कही अनुभूति का अभाव जीवन मे उसका अकाल समृद्ध खुशहाॅल जीवन का काल न बन जाये क्योकि अनुभूति का अभाव सिर्फ किसानो तक सीमित नही हर क्षैत्र मे इसका अकाल सा दिखाई पड़ता है जिससे हर एक आम और खास सभी बाकिफ है मगर दुर्भाग्य की पुरूषार्थ कोई नही करना चाहता अब जब जीवन मे पुरूषार्थ कि शुरूआत हुई है तो अनको अनेक सबाल है समस्या है मगर सर्ब स्वीकार्य समाधान नही है ऐसे मे सत्ताओ को अपने धर्म का पालन बगैर किसी हिचक के करना चाहिए और नागरिको को राष्ट्र् और सत्ताओ को कुछ समय और मौका अवश्य देना चाहिए क्योकि सत्ता सरकारो का धर्म राष्ट्र् जनकल्याण होता है जो उनके अस्तित्व का आधार भी होता है इसलिये आज सबसे बड़ी समझने बाली बात आम नागरिक और अन्नदाताओ को यह होना चाहिए कि सत्ता सरकार की ताकत के पीछे आखिर आमजन की ही ताकत होती है और लोकतंत्र मे उसकी यह ताकत भी होती है कि वह राष्ट्र् जन कल्याण मे कार्य न करने बाली सरकार को चुनावो समर्थन न दे उसे सड़क पर ला सकती है इसलिये सार्थक संवाद हो और समाधान भी बरना हर 5 बर्ष मे चुनाव होते है सही सिद्ध होने पर साबाशी और गलत सिद्ध होने पर ऐसी सत्ता सरकारो को सड़क पर ला सबक सिखाया जा सके  यही हमारी अंगीकार की हुई शफत है जो हमे लोकतांत्रिक होने का गौरव प्रदान करती है जिसमे हमे मिलजुल कर समृद्ध खुशहाॅल जीवन के लिये संघर्षशील रहकर अपने अपने जीवन मे निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन करना होता है जय स्वराज । 



 

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