सत्ता, सियासत, शासन के अहंकारी सेवाकल्याण से सहमा लोकतंत्र, जनतंत्र


बैलगाम सेवा के दंश से बैहाल कल्याण

व्ही. एस. भुल्ले

म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा


निश्चित ही जब हम इस समाचार की हेडलाइन पढ़ रहै होगे तो कुछ लोगो अच्छा न लगे मगर उस असहनिय दर्द का क्या करे जिसका दर्द निरीह प्राणी बगैर किसी अपराध के भोगने पर मजबूर है मे क्षमा चाहूगा अपने उन प्रियजनो से जो अपने कर्तव्य का निष्ठा पूर्ण पूरी निष्ठा के साथ करने दिन रात एक किये रहते है । बात सिर्फ इतनी सी है कि कुछ लोग अपने निहित स्वार्थवस अहंकारी स्वभाव वस लोगो कि समस्या ही नही सुनना चाहते पर्याप्त भरण पोषण के संसाधन और समस्या समाधान कि शक्ति वैधानिक रूप से प्राप्त होने के बाबजूद कुछ भी करना नही चाहते जब प्रदेश का मुखिया ही यह कहने पर मजबूर हो कि काम बगैर लेनदेन के हो तब आमजन के दर्द के मर्म को समझा जा सकता है । हर माह मोटी मोटी पगारे लग्झरी बाहन बंगले विधि सम्बत बैधानिक अधिकारो के बाबजूद लोगो का बिलखना इस बात का प्रमाण है कि कही तो कोइ्र्र कोताही कर रहा है चैबीसो घन्टे स्वयं को ब्यस्थ सिद्ध रखने मे माहिर और बैठक, जानकारी में दबे इन महानुभावो का भी दर्द यह है कि आखिर वह भी इतनी निष्ठा कर्तव्यपरायणता के आगे कैसै आगे बढ़े बहरहाॅल दिक्कत कहां है यह तो सेवा कल्याण मे दिन रात जुटी सत्ता, सियासत, या सिस्टम के वह भाग ही जाने मगर जिस अहंकार के बूटो तले आशा अकांक्षाओ बैरहमी रौंदा जा रहा है वह किसी से छिपा नही मगर शुरूआत कौन करे सबसे बड़ा सबाल आज यही है अभावो मे जबान होता बचपन, समृद्ध जीवन को कलफती जबानी और उम्मीदो मे उम्रदराज बुढ़ापा आखिर किस दर छाती कूटे कहां गिड़गिड़ाये कि उन्हे सिर्फ और सिर्फ उनका नैसर्गिक समृद्ध खुशहाॅल जीवन जी लेने दो शायद सत्ता सियासत के लिये आज यह बड़ा सबाल होना चाहिए काश आम जन की इस बैबसी को वह समझ पाये वरना सेवा के आधार को स्वयं आधार खोते देर नही लगती क्योकि जनाधार ही सत्ता सियासत का आधार होता है यह बात किसी को भी नही भूलनी चाहिए। फिर सत्ता सेवाकल्याण जो भी हो कहते है दर्द की दातारी कभी किसी कि नही हुई सो समय पर सटीक समझ ही श्रेष्ठ जीवन की पहचान रही है जय स्वराज ।


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