समाधान का सार्थक संदेश देने मे अक्षम साबित होती सत्ताये सर्बकल्याण मे सियासत, श्रेष्ठजनो की बैबसी है या निहित स्वार्थ जो सत्ता की खातिर उन्हे सामर्थहीन बना देता है
व्ही.एस.भुल्ले
म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा
म.प्र.- आज सबसे बड़ा यक्ष सबाल यह है कि जब सत्ताये वैधानिक तौर पर सक्षम सामर्थवान होती है तो फिर वह अहम मुददो पर बैबस सामर्थहीन क्यो नजर आती हेै क्या सर्बकल्याण मे सत्ता और श्रेष्ठजनो का कोई ऐसा स्वार्थ रहता है जो वह उनके निष्ठापूर्ण कर्तव्यनिर्वहन के आड़े आता है विधान अनुरूप हर सत्ता को बहुमत अनुसार 5 बर्ष तक राष्ट्र् जन की सेवा विकास कल्याण का मौका मिलता है और वैधानिक बहुमत के आधार पर निर्णय तथा कानून बनाने का इन सबके बाबजूद सिर्फ वोट या सत्ता ही ऐसे कारक हो सकते है जो कर्तव्य निर्वहन के आड़े आते हो वरना क्या कारण है जो आय दिन अधिकारो के नाम हो हल्ला मचा रहता है बैहतर हो कि सत्ता मे बैठने बाले श्रेष्ठजन आमजन अब इस बात पर बिचार करे कि इतनी बड़ी लोकतां़िक व्यबस्था मे कैसै सार्थक संवादपूर्ण, विश्वास पूर्ण माहोल बने जिससे असंबाद और अविश्वास की गहरी खाई को पाटा जा सके और समृद्धि, खुशहाॅली का माहौल आम व श्रेष्ठ जनो के बीच बनाया जा सके। जिससे स्वराज का सपना नगर महानगर से चल गाॅब गली गरीब तक पहुॅच सके और हमारी प्रतिभा पुरूषार्थ का जौहर एक मतैबा पूरी दुनिया देख सके। जय स्वराज

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