प्रधानमंत्री में आस्था हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए बैधानिक विश्वास का संकट राष्ट्र्, जन के हित मे नही विरोध के नाम भ्रम, लोकतंत्र के साथ विश्वासघात
व्ही.एस.भुल्ले
म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा
म.प्र.-अगर देश के प्रधानमंत्री की चिंता यह है कि नीतियो के विरोध की जगह भ्रमपूर्ण माहौल बना बैजा विरोध के स्वर सियासत चम
काने चलन शिरू हो चुका है और इसके पीछे वही लोग है जिन्होने किसानो का कभी भला नही किया अगर यह सही है तो यह न तो राष्ट्र्जन, न ही लोकतंत्र के हित मे है कहते किसी भी लोकतांत्रिक ब्यबस्था मे प्रधानमंत्री का पद सिर्फ प्रतिष्ठपूर्ण ही नही बल्किी बैधानिक होता है और उस पर अविश्वास लोकतंत्र के साथ विश्वासघात ही कहा जायेगा ये सही हो सकता है कि जिस तरह से चुनाबी माहोल मे प्रधानमंत्री या फिर मुख्यमंत्री मंत्री पदो को वैधानिक रूप से सुशोभित करने बाले व्यक्तियो का उपयोग हार जीत की खातिर लगाया जाता है यह उसी का दुष्परिणाम है कि आज लोग भ्रम के सहारे प्रधानमंत्री की कही बातो को झूठ ठहराने से नही चूक रहै और लोग अपने प्रधानमंत्री से ऐसे ऐसे सबाल करने से नही चूक रहै जो प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुकूल नही बल्कि सबाल करने बाले अन्जाने मे ही सही सिर्फ अपने प्रधानमंत्री ही नही इस महान लोकतंत्र का भी अपमान कर रहै है अगर नई किसान नीति को लेकर सरकार का निर्णय कुछ गलत है या फिर उसमे कुछ संसोधन लाजमी है तो बैधानिक मंच और लोकतांत्रिक तरीके से माॅग अवश्य होना चाहिए और यह आम नागरिक का अधिकार भी है और सरकार को भी बगैर समय गबाये आमा लोगो कि बात को सुन राष्ट्र्, जनहित मे उचित निर्णय लेना चाहिए जिससे असंवाद की स्थति ही पैदा न हो । आज आत्मनिरभर की खातिर हर नागरिक कि यही प्राथमिकता होना चाहिए। जिससे हर नागरिक का जीवन समृद्ध खुशहाॅल हो सके
जय स्वराज ।

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