सृजन में सियासत से इतर, सार्थक संबाद समस्या का समाधान सत्ता श्रेष्ठजनो का दायित्व, कर्तव्य जमीनी हकीकत से दूर, आधारहीन संघर्ष, विरोध कभी सार्थक नही हो सकते मर्यादित आचरण श्रेष्ठतम जीवन का आधार
व्ही.एस.भुल्ले
म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा .- जिस बिषय को लेकर दिल्ली मे किसान अन्दोलनरत है अब इसके पीछे की सच्चाई जो भी हो मगर इतना तय है कि जिस मुददे को लेकर किसान सड़को पर है उसकी सार्थकता निश्चित अपने आप मे एक सबाल है जिसका स्थाई समाधान होना भी लाजमी है मगर इस आन्दोलन मे जो आचार व्यवहार सिद्ध हो रहा है समस्या और सियासत तथा सत्ता का वह समाधान से कोसो दूर नजर आता है देखा जाय तो असल समस्या है सियासत या सत्ता के सहारे वोटो की फसल काटने कि जैसा कि आज तक सेवा समाधान कल्याण के नाम होता रहा है यही वह अविश्वास है आम जन श्रेष्ठजनो के बीच जो कभी किसी नाम से तो कभी किसी नाम के सहारे उन्माद पूर्ण सियासत का बाजार गर्म किये रहता है बेहतर हो कि आम व श्रेष्ठजन सत्ता से सीधा संबाद कर विश्वास के मंच पर अपनी अपनी प्रमाणिकता सिद्ध कर समृद्धि खुशहाली का मार्ग प्रस्त करे जिससे आने बाली पीढ़ी को हम एक श्रेष्ठ जन, समाज होने का प्रमाण विरासत मे दे सके वरना सत्ता के लिये सियासत चमकाने का यह खेल सेवा कल्याण विकास के नाम यू ही चलता रहेगा मगर इससे मुक्ति का सिर्फ एक ही मार्ग है और वह हो सकता है मर्यादित आचरण, और महात्वकांक्षाये वरना आशा आकांक्षाओ क्या वह तो होती ही असीमित है जिनका कोई अन्त नही फिर भी सार्थकता के भाव के साथ कम से कम श्रेष्ठ जीवन निर्वहन के प्रयास तो होने ही चाहिए जिससे दायित्वपूर्ण सियासत और संबाद से समाधान की सार्थक संस्कृति का दायित्व सुनिश्चित होने शुरूआत हो सके। जय स्वराज
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