शुम्भ निशुम्भ के संदेश और सासत मे मानव जीवन .........? तीरंदाज

 शुम्भ निशुम्भ के संदेश और सासत मे मानव जीवन .........? तीरंदाज 

व्ही. एस. भुल्ले 


भैया- कलयुग मे त्रेता का मंत्र आखिर तनै कै कहना चावै आखिर शुम्भ निशुम्भ के नाम पर तनै किसे डरना चावै इस अर्थयुग मे न तो अब प्रभु राम का राज है न ही रावण का कोई कुल दीपक जो रावण की कीर्ति को आगे बढ़ा सके न इस पृथ्वी पर राक्षस शेष रहै फिर तने क्यो अर्र बर्र बक रिया शै कै तने मानव धर्म कल्याण का भी अर्थ भूल गया शै जिसके लिये इतनी बढ़ी महाभारत हुई और हजारो लाखो सैनिको के साथ बड़े बड़े वीर शूर वीर उस भीषण युद्ध मारे गये मारे को तो थारी भृकुटी और वाणी की गर्जना सुन डर लागे । 

भैयै- आज के समय मे जो डर गया वो समझो मर गया कै थारे को मालूम कोणी यह कलयुग का बाप अर्थ युग है जिसने कलयुग आने पूर्व ही उसकी दिशा पलट दी जिसमे न तो विधि विधान की कोई सुन रहा है न ही सेवा कल्याण की रक्षा को लेकर कोई गम्भीर दिख रहा है सर्बकल्याण के मंत्र से दूर स्वकल्याण मे मानव जगत डूबा हुआ है । 

भैया- तो क्या म्हारी काठी समृद्धि खुशहाॅली के सपनो को देखते देखते ही अभावो के बीच फुक जायेगी और म्हारी आने बाली पीढ़ी भी नैसर्गिक समृद्धि से बंचित रह जायेगी फिर भाया काहे का जनतंत्र और कैसा सेवा कल्याण खैर छोड़ तू सेवा कल्याण की कहानी मने तो तू ये बता म्हारे महान प्रदेश मे हालिया स्थानीय सरकारो के चुनाव होने बाले हे कै थारी भावी कै इस उठापटक के दौर मे जनादेश हासिल कर सेवा कल्याण कर पायेगी ।

भैयै- तनै तो बाबला शेै के थारे को मालूम कोणी म्हारे महान लोकतंत्र मे सेवा कल्याण की ब्यार चल पढ़ी है और फुटटल फर्सी से लेकर कुबेरपति सभी को सेवा कल्याण की हाथो हाथ  पढ़ी हे फिर भाया सेवा कल्याण मे गाड़ी भरे कलदार भी तो लगते है थारे पर तो चवन्नी भी नही। कैसै करेगा सेवा और कैसै होगा कल्याण फिर शुम्भ निशुम्भ की आत्मा भी तो इस धन युग मे भटक रही है जो राजा रावण का अक्षरशः पालन करने तैयार खड़ी है उनका मानना है कि अगर सियासत के ऋषिमुनि ज्ञान विज्ञान को यज्ञ के माध्ययम से शोधित कर अचूक अस्त्र हासिल करने मे सफल हो गये तो फिर सियासत मे असुर प्रवृति का नाश होना निश्चित है । 

भैया- मने समझ लिया थारा इसारा मगर मने न लागे थारी भावी बगैर चुनाव लड़े मानने बाली है और नोट बन्दी के बीच सेवा कल्याण को बचाकर रखे कलदार इस चुनाव मे बैभाव लुटाने बाली है आखिर अर्धागनी है म्हारी सो धर्म रक्षा मे म्हारे हन्डे कुन्डे भी बिच ले तो भी मने कुछ बोलने बाला नही गर मने आज भी न जागा तो इतिहास मे हाथो हाथ पति धर्म का  दोषी करार दिया जाउगा और आने बाली पीड़ी मे गददार कहा जाउगा इसलिये अब भले ही म्हारा चिन्दी पन्ना दम तोड़ दे मगर चुनावी वैला पर पतिपरमेश्वर होने के नाते थारी भावी को पीठ नही दिखाउगा बोल भैया कैसी रही ।

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