बातो के बतासो मे गाॅब गली बैहाॅल, बैबिनार मे सेवा तो बैठको से कल्याण
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
म.प्र. - सत्ता सियासत मे आजकल जिस तरह से बातो बैठको का दौर चला है ऐसे मे कलफते सेवा कल्याण के बीच गाॅब गली मे कोहराम मचा है अब इस सच को लोग स्वीकारे या अस्वीकारे मगर हकीकत फिलहाॅल यही है गाॅब गली मे मनमानी पर उतारू सेवा कल्याण जिस तरह से बैफिक्र लापरबाह नजर आता है फिर चाहै वह जल राशन स्वास्थ शिक्षा हो या फिर प्राक्रतिक संपदा पर माफिया राज हो सभी दूर मानवता सिसकने कांपने पर मजबूर नजर आती है रोज रोज की बैठके बैबीनार वीडियो कांफ्रेस मे सेवा कल्याण उतावले माईबापो की निष्ठा देख माननीय श्रीमानो का कलेजा भले चैड़ा होता हो मगर संड़ाध मारती शहर नगरो की नालिया छदबिछद सड़को की नालियो पर जंप करते वाहन भले ही चुप रह सफर करने मजबूर हो आय दिन बाधित जल सप्लाइ्र्र्र और जल सप्लाई मे डलते ही मोटरे फुकने के किस्से आम हो मगर शर्म किसे ये मानो जन जन का सौभाग्य है जो उन्हे बिरासत मे भले ही न मिला हो मगर आज यह उनकी मिलकियत लगती जिसे न तो कोई छीनना चाहता न ही कोई दाबेदार दिखता इतना ही नही अंगीकार विधि विधान मौजूद विधि की बिरासत इतनी अकूत की बड़े बड़े धन कुबेर तक शर्मा जाय जिसे समालते समालते काठी का बजन बड़ने से पहले कम हो जाता है उस पर माननीय श्रीमानो के समय समय पर आदेश निर्देशो ने माने समुचा जीवन ही इतना धनधान्य कर दिया कि लोगो अब कुछ पाने या हासिल करने की कामना ही न बची हो मगर निष्ठ कर्तव्य निष्ठा का धन्यबाद तो फिर भी बनता है उनका अभिवादन तो बनता ही है क्योकि सेवा कल्याण का काॅरबा तो चल ही रहा है फिर माध्यम जो भी हो अगर यह सही है कि बैठक बैबीनारो से माईबापो पर अंकुश बना रहता है और सेवा कल्याण का काॅरबा सरपट दौड़ता है तो फिर यक्ष सबाल यह है कि आज तक समृद्ध खुशहाॅल जीवन के लिये तत्पर सेवा कल्याण का लश्कर गाॅब गली तक उस गरीब के घर तक क्यो नही पहॅचा जिसकी बाॅट जोहते जोहते उसकी कई पीढ़िया इस दुनिया से बिदा ले अभावो के बीच जा चुकी है तो कुछ आज भी संघर्षरत है बात जरा कड़बी है मगर क्या करे कोई सुनता कहां बैहतर बैठके बैबीनार परिणाम मूलक और आम जन के बीच विश्वास जाग्रत कर उनकी समस्या का स्थाई समाधान देने बाली हो जिससे पूरी निष्ठा के साथ जन कल्याण मे जुटे श्रीमान माननीय फक्र के साथ कह पाये की उनकी सेवा कल्याणकारी है और आमजन ऐसी सेवाओ पर गर्व पाये ।

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