प्रमाणिक पुरूषार्थ के अभाव मे, निराश आशा अकांक्षा
सढ़े सिस्टम से असंभव समृद्ध खुशहाॅल जीवन
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
म.प्र.- सत्ताये सरकारे कितनी ही कोसिस क्यो न कर ले बगैर सढ़े सिस्टम मे सुधार किये जीवन मे समृद्धि खुशहाॅली दूर कोणी बनी रहने बाली है। क्योकि प्रमाणिक पुरूषार्थ के अभाव जो हालत आशा अकांक्षाओ कि सभी के सामने है वह किसी से छिपी नही है जिस तरह से आशा अकांक्षाओ के बीच निराशा पैठ जमा रही वह बड़ी ही घातक हो सकती है जिस पर सिर्फ विचार ही पर्याप्त नही प्रमाणिक पुरूषार्थ की सख्त दरकार है और यह तभी सम्भव है जब सत्ताये सेवा कल्याण के साथ सिस्टम को दुरूष्त कर अपनी प्रमाणिता सिद्ध करे क्योकि कर्तव्य निर्वहन के मार्ग मे जो बातो के बताशे बाटने का क्र्रम चल निकला है वह अगर अब भी नही थमा तो वह दिन दूर नही जब विश्वसनीयता का अकाल अच्छे अच्छो को रसातल तक का सफर बगैर नही चूकेगा जो न तो उन सत्ताओ के हित मे है न ही जन जीवन राष्ट्र्हित मे होगा बैहतर हो समय रहते सुधार की शुरूआत हो राष्ट्र्हित मे जुटे लोगो की प्रमाणिकता सिर्फ सत्ता ही नही सिस्टम मे भी सिद्ध हो जय स्वराज ।

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