जीवन को खेल न समझे सत्ता सियासत , उसका संरक्षण कल्याण ही सबसे बड़ा मानव धर्म - व्ही. एस. भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज
धर्मेन्द्र सिंह
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
कहते है सृष्टि विरूद्ध सृजन न तो सृष्टि ही स्वीकारती न ही उससे श्रेष्ठ जीवन का निर्माण संम्भव होता है जीव जीवन की सम्पूर्ण उत्पत्ती उसका विर्सजन सार्थक समाधान समझ अनुसार सृष्टि शिक्षा का सामान्य घटनाक्रम है जिसे समझने समझाने ऋषि मुनि तेज तवस्वियो ने कड़ी साधना त्याग तपस्या कर मानव जीवन की उपायदेयता उसकी श्रैष्ठता और कल्याण मे उसकी सार्थकता सिद्ध करने अपना निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन किया सिर्फ इसलिये कि आने बाली उसकी पीढ़िया मानव कर्म की उपायदेयता और सृष्टि कल्याण अर्थात मूल धर्म की रक्षा कर पृथ्वी या मौजूद भूभाग पर उत्पन्न जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बना सृष्टि सिद्धांत अनुरूप उसे सार्थक सिद्ध कर उस जीवन का विर्सजन समाधान सार्थक रूप से हो सके उसके लिये मानव ने अपनी अपनी श्रेष्ठ समझ अनुसार विभिन्न विधानो को अंगीकार कर उन्हे स्वीकार किया और अपनी अपनी आस्था समझ अनुसार उसका पालन भी करते आ रहै है मगर सर्बकल्याण को समर्पित मानव जीवन कब स्वकल्याण का सार्थी बन गया यही आज का सबसे यक्ष सबाल होना चाहिए उक्त बात स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही. एस. भुल्ले ने युवा टोली को सम्बोधित करते हुये खास बातचीत मे कही उन्होने कहा की सत्ता सियासत को जीवन की अनदेखी नही करना चाहिए न ही उसे अपने सियासी मंसूबे पूर्ति का माध्यम बनाना चाहिए क्योकि जीवन सृष्टि की अनमोल धरोहर है इसके मार्ग की बाधा बनना या उसके सृर्जन पूर्ण मार्ग की बाधा बनना दोनो अधर्म की श्रेणी मे आते है और मानव के मूल कर्म कल्याण से द्रोह सृष्टि से सीधे विद्रोह की श्रेणी मे आता है जो अहंकारी के लिये शौर्य मगर मूर्खता ही कहा जा सकता है इतिहास गबाह है इसलिये सर्बकल्याण ही सबसे बड़ा धर्म और कर्म जीवन की कुॅजी होना चाहिए । जिससे जीवन की श्रेष्ठता सिद्ध हो सके ।

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