जन के जान की रक्षा राजसत्ता धर्म , जहरीली शराब से मौतो पर म.प्र. के मुरैना मचा कोहराम


जबाबदेह बने लाचार, हटने हटाने को लेकर उठे सबाल

वीरेन्द्र शर्मा 

विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


म.प्र. - गत दिनो जहरीली शराब से हुई 20 से अधिक मौतो पर जबाबदेहो पर कार्यवाही के पश्चात राजसत्ता का अगला कदम राहत हो मगर जो लोग राजसत्ता की लापरबाही के चलते इस दुनिया से चल बसे वह अब लौटने बाले नही कुछ माह पहले की ही तो बात है जब ऐसी ही एक घटना उज्जैन संभाग मे सुनने मिली थी और अब चम्बल संभाग से यह दुखद खबर है भले ही राजसत्ता ने मातहतो को हटा आमजन मेे यह संदेश देने की कोशिस की हो कि वह लापरवाह लोगो के प्रति के कितनी सख्त है मगर क्या राजसत्ता की यह कार्यवाही इस बात की गारंटी है कि अब इस तरह का हादसा दुर्घटना आगे से नही होगी तो इसका सटीक जबाब की कोई गारंटी नही क्योकि जो विभाग सीधे तौर पर इस जबाबदेही को ओढ़े है न तो उसके पास पर्याप्त अमला है न ही उसके पास संसाधन दूसरे नम्बर पर जो अमला आता है उस पर अमला भी है और संसाधन भी मगर उस के सर पर इतना बोझ है कि वह सीधे तौर पर अपनी जबाबदेही ही नही मानता रहा सबाल शराब माफिया का तो उसे तो हर हाॅल मे धन के लिये धंधा करना है सो वह अपने मंसूबो को किसी भी हालत मे पूरा करने एढ़ी चोटी का जोर लगाये रहता है ऐसे मे बड़ी जबाबदेही उसी राजसत्ता की बन जाती है जो जन के जान की रक्षा और जनकल्याण का दम भरते नही थकती इसलिये ही कहते हे समरथ को नही दोस गुसाई सो अगर जनतंत्र की राजा जनता है तो बगैर किसी लागलपेट के अपना अच्छा बुरा स्वयं देखना होगा और उसी सिददत से स्वयं की जबाबदेही को समझना होगा वरना आने बाला समय क्या क्या दिन जन को दिखा सकता है यह आज सभी को समझने बाली बात होनी चाहिए क्योकि राष्ट्रनिर्माण का कारबा अब काॅफी आगे निकल चुका है अगर स्वयं की महत्वता सिद्ध करनी हे तो सफल पुरूषार्थ तो हर नागरिक को करना ही होगा। 

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