विराट जीवन की वैभव गौरबपूर्ण कृतज्ञता का वृतांत कुछ शब्दो मे व्यक्त करना असम्भव
जीवट ममत्व संस्कार संघर्ष की जीती जागती मिशाल थी राजमाता विजया राजे सिंधिया
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
जीवन मे सेवा कल्याण की विराटता कड़े संघर्ष के साथ ममत्व और जीवन के प्रति न्यायप्रियता तथा समाधान न होने तक संघर्ष की पराकाष्ठा और जीवन के श्रेष्ठतम संस्कारो का सेवा कल्याण की सियासत मे गहरा समावेश उनकी कार्यशैली मे समाहित था ऐसे विराट जीवन की वैभव गौरवपूर्ण कृतज्ञता का वृतांत कुछ शब्दो मे हो पाना असंभव ही नही न मुमकिन है कै. राजमाता विजयराजे सिंधिया तो जीवट ममत्व संस्कार संघर्ष की जीती जागती मिशाल थी ऐसी शख्सियत को जीवन मे पाकर कौन स्वयं को गौरान्वित महसूस नही करना चाहेगा यह सौभाग्य ही है की ममत्व की उस प्रतिमूर्ति का सानिग्ध हमे मिला हम धन्य है कृतज्ञ की हमे उनका स्नेह आर्शीबाद मिला मगर आज उनकी पुण्यतिथि है गर्व के साथ उस विराट ममत्व का विछोह भी है जिसकी भरपायी शायद इस जीवन को नसीब न हो मगर उनके संघर्ष संस्कारो की विरासत उनके उत्तराधिकारियो के नाते आज हमारे पास जिससे जीवन की सार्थकता सिद्ध कर हम अम्मा महाराज को सच्ची श्रद्धांजली दे सकते है और यह तभी संम्भव है जब हम उनके बताये रास्तो को आत्म सके ।

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