सामर्थ से तत्कालिक सत्तागत संस्थागत सामाजिक समाधान तो मिल सकता है मगर स्थाई समाधान नही


समाधान तो तभी संभव है जब पुरूषार्थ कल्याणकारी हो 

व्ही. एस. भुल्ले

विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


सामर्थ सत्ता , संस्था , समाज का हो या फिर व्यक्ति समूह संगठन का अगर समाधान कि शर्त सामर्थ है तो उसका समाधान तत्कालिक तो मिल सकता है मगर स्थायी नही और अगर किया गया पुरूषार्थ कल्याणकारी न हो तो वह नासूर बन जीवन को बैहाल बनाने काॅफी होता है इसलिये स्थाई समाधान कि पहली शर्त सर्बकल्याण मे निहित होता है आज के समय मे यह बात सिर्फ सत्ता सियासत ही नही व्यक्ति समूह संगठन के लिये भी समझने बाली होना चाहिए अगर आजाद भारत मे विधि अनुरूप हमने विधान को अगीकार किया है तो फिर विधि अनुरूप ही समाधान स्थाई और कल्याणकारी हो सकता है यह बात न तो सत्ताओ को भूलना चाहिए न ही आमजन को क्योकि विधि के आगे हमारी ब्यबस्था मे कुछ नही और यही विधान का भी तकाजा होता है अगर सत्ता निरंकुश है तो 5 बर्ष मे उसका समाधान है और विधि को मानने बाले निरंकुश है तो उसके लिये कानून है यही हमारी अंगीकार व्यवस्था है और यही लोकतंत्र है जय स्वराज । 

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