हटो बचो के सेवा कल्याण से कंगाल हुआ विकास
बैठको की बाढ़ से बैहाल हुआ मानव और कल्याण
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
कोरोना से एक बर्ष से बैहाल मानव और कल्याण का जीवन जैसै तैसै पटरी पकड़ ही रहा था कि हटो बचै के सेवा कल्याण से विकास कंगाल नजर आता है तो वही दूसरी ओर बैठको की बाढ़ से मानव जीवन बैहाल होता जा रहा है जिस विचार आज की जरूरत है क्योकि लोग बैहाल है सत्ता सियासत का लोकतंत्र मे धर्म है कि वह लोगो के जीवन को सुरक्षित समृद्ध खुशहाॅल बनाये जिसके लिये आप प्रयासरत भी है मगर परिणामो का अभाव इस बात का प्रमाण है कि सब कुछ ठीक नही चल रहा जिस तरह से हर विभाग मे धन का रोना मचा है विकास अवरूद्ध हो रहा है तो वही कभी बी सी तो कभी बैठको का दौर चल रहा है तो वही सियासत का कारबा मानव धर्म दर किनार नगरीय चुनावो मे जुट चुका है जिसके चलते सीधे लाभ पहुॅचाने बाली योजनाओ पर समुचा अमला मानो लग चुका है मगर चुनावी बैला पर शहीद होता मानवीय सरोकार आज बिलख रहा है जीत चुनाव के नशे मे चूर सेवा कल्याण भी कभी इतना निस्ठुर हो सकता है किसी ने कभी सपने मे भी न सोचा होगा मगर आज सभी को समझने बाली बात यह है कि दीन हीन आशा अकांक्षाये भी तो हमारी है जब यही खुश नही रहेगे तो फिर सत्ता सियासत का अर्थ ही क्या रह जायेगा इसलिये सभी को सर्बकल्याण के मार्ग पर बढ़ना चाहिए जिससे जीवन की सार्थकता सिद्ध हो सके । जय स्वराज ।

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