तंत्र पर अंधविश्वास और अहंकार के आगे गिड़गिड़ाती समृद्धि
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
कहते है सत्ता को अहम अहंकारी न होकर सहज सर्बकल्याणकारी होना चाहिए जिससे मानव कल्याण का कार्य सहज रूप से हो सके और प्राक्रतिक समृद्धि का लाभ सभी को समान रूप से मिल सके मगर सिस्टम पर हमारे अंघ विश्वास और अहंम अहंकार के चलते प्रतिभाओ के पास ऐसा कोई आॅपसन मौका ही नही जो वह सर्बकल्याण मे अपनी अधभुत प्रतिभा का प्रदश्र्रन कर स्वयं को सिद्ध कर पाये अभावो मे खेलता बचपन और मुफलिसी मे कटती जवानी और उम्मीदो मे अन्तिम बिदा लेता बुढ़ापा आज की सत्ताओ के आगे भले ही कोई सबाल न हो मगर मानवता का तो तकाजा बनता ही है ये अलग बात है कि लोकतंत्र मे चुनाव और जीत ही अब अहम मुददा रह गया हो मगर समृद्धि का तकाजा तो मानवता पर बनता ही है आखिर क्या कारण है जो जीवन अपनी समृद्धि पर कुलाछे भर शेष जीवन को समृद्ध बना सकता था वह आज बैवस मजबूर है आखिर क्या बैबसी मजबूरी है हमारी जो हम सब कुछ होने के बाबजूद हम बैहाल बने हुये है आज यही सब को समझने बाली बात होना चाहिए । जय स्वराज ।

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