मूल स्वभाव से संघर्ष करती संवृद्धि , सत्ता स्वरूप बदला सिस्टम बदला नही बदली सूरत
स्पष्ट है सिद्धांत विज्ञान रसायन का अर्थ , भ्रम से जूझते यक्ष सबाल स्वराज मे छिपा है समाधान
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.
एक गौरव पूर्ण विरासत के उत्तराधिकारी प्राक्रतिक समृद्धि धनी भूभाग पर समस्या संकट शिक्षा समझ की कंगाली से साफ है कि हमने हमारी ही गलतियो से बहुत कुछ खोया है और उसे हासिल करने मे हम आज भी अक्षम असफल साबित हो रहै तो किसी को कोई अतिसंयोति नही होनी चाहिए आर्यवृत के रूप मे खण्ड खण्ड मे स्थापित यह भूभाग अनादिकाल से ही इर्षा द्वेष स्वार्थ अहंम अहकारियो की महात्वकांक्षाओ का शिकार रहा है और एकता के संघर्ष मे समय बेसमय छिन्न भिन्न होता रहा है परिणाम कि विदेशी आक्रांताओ के लिये यह भूभाग पसंदीदा बनता गया कारण हमारा मूल स्वभाव जिसने कभी हमे यह सौचने का ही वक्त नही दिया कि राष्ट्र के मायने क्या होते है परिणाम छोटे छोटे देश या कुछ सेकड़ा की तादाद मे सैनिको के साथ लूटमार के मंसूबो से हमारे पबित्र भूभाग पर आये लुटेरे हमारे शासक बन गये और हम उनका तीब्र बिरोध खण्ड खण्ड होने के चलते नही कर सके और हजारो बर्षो की गुलामी को हमने अंगीकार कर लिया आज जब हम आजाद ऐसे मे भले ही हमारा स्वरूप एक अखण्ड राष्ट्र के रूप मे हो मगर जिस तरह का जहर सियासी मसूबे पूरे करने हमारे बीच देखने मिल रहा वह शुभ संकेत नही तथा जिस तरह से समृद्धि के मार्ग तलाशे जा रहै है उस सबाल के साथ जिनके उत्तर हमारे पूर्वज हजारो सेकड़ो बर्षो की कड़ा तपष्या कर विरासत मे हमे छोड़ गये है वह शिक्षा संस्कार समझ के अभाव मे हम इधर उधर ढूढ़ते फिरते है मगर उनके उत्तर सभी के सामने है आज अमेरिका के एक बड़े उधोगपति अर्थात टेक्सला कम्पनी के मालिक ने आॅफर किया है कि काॅर्बन उत्सर्जन के लिये लोग आइडिया देगे तो वह कुछ मदद करेगे अगर हमारी 72 बर्ष की सियासी विरासत इतनी संवृद्ध होती और हमारी नस्ले अपनी संस्कृति संस्कारो से समृद्ध होती तो सबाल भी हमारे होते और उत्तर भी हमारे होते बहरहाॅल जो भी हो जिस अहम अहंकार मे सत्ताये समृद्धि के सपने देखती रही है उससे न तो कभी समृद्धि आने बाली है न ही खुशहाॅली क्योकि जिस नस्ल के खून मे ही शिक्षा संस्कारो भण्डार और समझ समुचे ब्रम्हमांण्ड का खाका हो वह कैसै कंगाल हो सकता है मगर स्वार्थवत सियासत और डरी सहमी अहंकारी सत्ताये कभी फलदायी नही हो सकती न ही वह इस महान भूभाग का कल्याण कर सकती है आज यही सभी को समझने बाली बात होनी चाहिए। जय स्वराज

Comments
Post a Comment