जहर के कारोबार थर्राई मानवता राजस्थान, उ.प्र. के बाद अब म.प्र. भी जकड़ मे
आबकारी अधिकारी निलंबित तो कलेक्टर एस पी हटाये
वीरेन्द्र भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म.प्र. के मुरैना मे अबैध जहरीली शराब से हुई 20 से अधिक मौतो से साफ है कि अबैध जहरीली शराब का कारोबार राजस्थान , उ.प्र. , के बाद अब म.प्र. मे भी अपनी जड़े जमा चुका है मगर सबाल वही है की मोटी मोटी पगार जनधन से प्राप्त करने बाले इतने निर्दयी कैसै हो सकते कि धन लालसा मे डूबे लोगो खुलेयाम शराब के नाम जहर बैच रहै है और समुचा अमला इस बात के इन्तजार मे बना रहता है कि घटना घटे तब वह कार्यबाही की जैहनत उठाये जब कि अबैध शराब न बिचे इसे रोकने की सीधी जबाबदेही आबकारी महकमे की होती है तो वही पुलिस को भी यह जिम्मा विधि अनुरूप मिला हुआ है कि उसके थाना क्षैत्र मे अबैध शराब का कारोबार न हो जिसके लिये वीट गार्ड से लेकर ए एस आई थानेदार सी एस पी तक की जबाबदेही होती है जो हालिया म.प्र. शासन की कार्यवाही से सिद्ध है तो वही आबकारी महकमे को किराये के वाहन गश्त व अबैध शराब कि धरपकड़ के लिये मिले होते है और उपनिरिक्षक से लेकर आरक्षक तक की तैनाती रहती है इसके अलाबा हर गाॅब मे पटवारी ग्राम सहायक पंचायत सचिव भी आते जाते बने रहते जिनकी शासकीय सेवा मे होने के रूप मे नैतिक जबाबदेही होती है कि वह अपने बरिष्ठ अधिकारी या जबाबदेह अधिकारियो को इस तरह की गतिविधियो से अबगत कराये मगर ऐसा नही हुआ और 20 लोगो की जान अबैध शराब ने ले ली । यहाॅ फिर वही सौ बात कि एक बात कि कैसै जबाबदेहो की जबाबदेही तय हो और कैसै रूके इस तरह के जघन्य अपराध ।

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