संकट के कंटको से मुक्ती का अचूक आयडिया......? तीरंदाज


सत्ता सियासत मे प्रायवेटाइजेशन 

व्ही. एस. भुल्ले 


भैया - मुये बाबले माटी पड़े थारी काठी पर जो तने म्हारे 72 बै गणतंत्र दिवस के मौके पर म्हारी सत्ता सियासत की कृतज्ञता पर हिस्से बाॅटे की बात कर रहा है कै थारे को मालूम कोणी कि सेवा कल्याण सर्बकल्याण के लिये पूरे सामर्थ के साथ पुरूषार्थ विगत 72 बर्षो से निर्विबाद रूप से हो रहा है कै थारे को म्हारी समृद्धि खुशहाॅली की उॅची उॅची ईमारते और सेवा कल्याण से पटे गाॅब गली नजर नही आते चहुॅ ओर रामराज्य के जयकारे है और अब प्रभु राम भी तो जल्द से जल्द भव्य भवन मे विराजने बाले है सत्ता सियासत के नव रतनो की नाक मे नकेल डाल फिर संकट कंटक भय भूख भृष्टाचार सहज सरल सेवा कल्याण की खातिर शासन प्रशासन मे प्रायवेट सेवाओ का दौर भी तो चल रहा है मने तो बोल्यू अटक से लेकर कटक तक पसरी म्हारी निष्ठा पर थारी छाती क्यो फट रही है । 

भैयै - तनै तो म्हारे मसबरे पर यू ही भड़क रहा है मने तो सेवा कल्याण के क्षैत्र मे म्हारी महान सत्ताये सियासत नये नये कीर्तिमान स्थापित करे मने इसलिये नये आयडिया को दे रहा हुॅ जिससे सत्ता सियासत मे भी प्रायवेट एजेन्सियो का सहारा ले आम जीवन मे जीवन को संकटो के कंटको और दैत्य का आकार लेता भृष्टाचार को धूल चटा आम जीवन सहज सरल समृद्ध खुशहाॅल बनाया जा सके और आत्म निर्भर का सपना हाथो हाथ पूरा किया जा सके । क्योकि मने न लागे कि जब तक कानून नीति बनाने मे श्रेष्ठ प्रायवेट एजेन्सियो का इस्तमाल नही होगा तब तक म्हारी दिशा दशा नही सुधरने बाली अब म्हारे ही धन चलने बाले बैंको की सेवा की बात करे तो झोपड़ी को कमरे मे तब्दील करने उधर का धन लेने पर सहज सेवाओ की शर्ते इतनी सरल है और इतनी कटिबद्ध है कि जनधन डूबना तो दूर की कोणी काठी नीलाम कर कोणी कोणी बसूल हो जायेगी मगर मने तो म्हारे बैंको की शर्तो का भाया मुरीद हो लिया 1 आधार कार्ड, पैन कार्ड, तीन बर्ष के आयकर रिटर्न, प्लाट का डायबर्सन, न. पा. निगम से स्वीकृत नक्शा, खसरा नकल, नामान्तरण पहले तेहसील फिर न. पा. निगम, तीस बर्ष तक के मालिकाना हक की प्रमाणिक प्रतिलिपि, संपत्तिकर की रसीद, रजिस्ट्री मूल के साथ जिससे क्रय की गयी है उसकी प्रति, प्लाट की माडगेज, गारंटर प्लाट का मूलांकन भवन निर्माण का प्रमाणिक प्राक्कलन बैंक द्वारा अधिकृत वकील द्वारा सभी दस्तावेजो की प्रमाणिकता बैक द्वारा अधिकृत वकील के माध्यम से फिर बैंक अधिकारी का विवेक यह तो मोटी मोटी जानकारी है इसके अलाबा भी अन्य दस्तावेज हो सकते है जो म्हारे महान नीति निर्माताओ ने सेवा भाव से कल्याण की खातिर हम पर दया रहम कर सिर्फ सेवा की खातिर कर रखे हो अब जब ऐसी सेवा कल्याण हमारे बीच मौजूद तो क्यो न म्हारे मूड़धन्यो बजन कम करने सत्ता मे भी प्रायवेट एजेन्सियो की सेवा ली जाय सेवा मिले न मिले कम से कम म्हारा गाॅब गरीब तो धन्य हो जाये । 

भैया - मने समझ लिया थारा इसारा साढ़ा काड़ू ठीक ही बोल्या कि मुये थारी खड़ी की खड़ी काठी सूख जायेगी मगर इस सेवा कल्याण के मैेल मेे कोठरी बनाना तो दूर की कोणी थारे को एक चबन्नी भी चोटी गिरबी रखने बाद नही मिल पायेगी अगर बैको से सेवा चाहिए तो तने भी हर्षद मेहता की रूह का अनुष्ठान करा या फिर तने नीरव मोदी विजय माल्या सहित कई महान उस्ताद म्हारे बैको ने जन धन दोनो हाथो से लुटा पैदा किये उनका चैला बन जा तब तो थारी चल जा जायेगी वरना म्हारी  काठी कि गिनती भी लाखो करोड़ो आसमान के नीचे दम तोड़ने बालो मे हो जायेगी बोल भैया कैसी रही । जय स्वराज ।

  


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