श्रेष्ठतम पुरूषार्थ से बन्चित जीवन कंटक युक्त होता है
समय का सदउपयोग ही सर्बकल्याण मे सक्षम रहता है
व्ही. एस. भुल्ले.
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
कभी एक नारा होता था कि समय सोना होता है इसे बर्बाद न करे इतना ही नही ग्रन्थो मे भी इस बात का उल्लेख है कि पितामह भीष्म के जीवन का एक ही पाप था कि उन्होने समय पर क्रोध नही किया मगर जटायु के जीवन का एक ही पुण्य था कि उसने समय पर क्रोध किया परिणाम स्वरूप एक को वाणो की शैया मिली और एक को अन्तिम समय प्रभु राम की गोद मिली । मगर अब न तो प्रभु राम है न ही श्रीकृष्ण अगर आज कुछ शेष है तो उनके द्वारा स्थापित जीवन के श्रेष्ठतम जीवन मूल्य और मानव धर्म की वह मिशाल जिसे उन्होने जीवन मे जीकर स्थापित किया और मानव धर्म के मूल्य बताये अगर आज मान भी लिया जाये कि समयचक्र कलयुग की ओर इसारा करता हो मगर धन युग से इन्कार भी नही किया जा सकता स्र्वकल्याण की संस्कृति से दूर स्वार्थवत संस्कृति के हावी होने से मुॅह नही मोड़ा जा सकता आज जिस तरह से सत्ताये समाज सियासत सेवा कल्याण के रथ पर सबार सर्बकल्याण कि ध्वजा पताखा फहराने मे लगे है उससे देखकर तो सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि लोग मानव धर्म के मायने ही नही उन महापुरूषो की कृतज्ञता को भूलते जा रहै है जिसका पालन उन्होने स्वयं के जीवन काल मे लाख कष्ट सहकर भी किया अगर आज की सत्ताये समुचे जीवन न सही कुछ बर्ष ही उस जीवन को जी पाये तो यह उनके जीवन काल की सबसे बड़ी उपलब्धियो मे से एक होगी मगर भाई लोगो ने इसे अध्यात्म का नाम दे रखा है यथार्त नही , ज्ञान को बस्ते मे बाॅध विज्ञान को ही भगवान अंगीकार कर लिया है अब ऐसे मे कैसै हो सर्बकल्याण कैसै हो समय का सदउपयोग अपने आप मे ही एक बड़ा सबाल है हर दिन चुनाव और 24 घन्टे की सियासत से साफ है की जीवन मे सृजन का कोई मूल्य नही बैहतर हो हम अर्थ विज्ञान स्वार्थ की भूलभुलैयो से दूर अपनी अमूल्य विरासत अध्यात्म ज्ञान विज्ञान पर ध्यान दे ओर मानव मूल्यो की रक्षा मे स्वयं को समर्पित कर मानव जीवन को सृजन मे सिद्ध करे यही आज के समय मे मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी । जय स्वराज ।

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