स्वार्थवत सियासत और जीवन मूल्य खोते सरोकार
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
अपनो के हाथो पुरूषकृत होने मे निश्चित ही गर्व गौरव की अनुभूति होती मगर गर्व और गौरव की बात तो तब होगी जब यह राष्ट्र गौरान्वित होगा । उक्त भाव उस महापुरूष के है जिसने समुचा जीवन अपने राष्ट्र और जन को समर्पित कर स्वयं के जीवन को मौजूद संसाधनो बीच सिद्ध किया जिन्है सेकड़ो बर्ष बाद भी सत्ता सियासत मे सम्मान जनक स्थान प्राप्त है । मगर आज की सियासत जिस रास्ते सरपट दौड़ रही है उसमे न तो जीवन मूल्य न ही सरोकारो का कोई मूल्य नजर आता मगर फिर भी सेवा कल्याण विकास की गाड़ी आशा अकांक्षाओ के उबड़ खाबड़ रास्तो पर सरपट दौड़ रही है लोकतांत्रिक परम्पराओ के विपरीत सर्बकल्याण का जुनून कितना सफल संक्षम साबित होगा यह तो भबिष्य तय करेगा मगर परिणाम की चिन्ता फिलहाॅल जल्दबाजी होगी मगर जिस अन्दाज मे देश मुखिया ने सदन मे भाव प्रकट किये है वह सुखद सियासत के संकेत कहै जा सकते लेकिन जिस तरह से अन्य सियासत दान बिफरे हुये सेवा कल्याण सर्बकल्याण को लेकर वह भी इस महान लोकतंत्र के सामने बड़ा सबाल है कारण स्पष्ट है स्वयं सिद्ध सर्बकल्याण और अहम अहंकार जिसमे सुधार की अतिअवश्कता है और किसी भी सिद्ध पुरूष के लिये यह सम्भव है बस थोड़ी कोसिश भर करना है ऐसा ही हो ऐसा राष्ट्र जन का विश्वास है क्योकि सत्ताये आनीजानी है मगर मानव धर्म स्थाई है जिसकी रक्षा हर मानव का धर्म होना चाहिए फिर उसकी भूमिका इस जीवन मे जो भी हो आज यही आज के लिये समझने बाली बात होनी चाहिए । जय स्वराज

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