हटाना लगाना कोई हल नही, सिद्ध करनी होगी स्वयं की सार्थकता


मौतो पर मातम और माननीय की मार्मिक संवेदना

वीरेन्द्र शर्मा 


विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

म.प्र. सीधी से सतना जा रही बस के नहर मे समा जाने हुई आधा सेकड़ा से अधिक मौतो पर मातम बैहद दर्दनाक है और ब्यवस्था के लिये शर्मनाक भी क्योकि बर्षो से कई मर्तबा हम लोम हर्षक हादसे देखते रहै है मगर समाधान के नाम वही ढाक के चार पात नजर आते मगर अब माननीयो ने जो समाधान ढूड़ा है वह बड़ा हास्य पद हैे फिर वह जहरीली शराब से मौतो का मामला हो या फिर बस का झुलसना या नहर मे गिरना या फिर आमने की टक्कर मे लोगो की जाने जाने का मामला हो हटाना फिर किसी नये को लगाना या फिर निलंबन करना कोई सार्थक समाधान नही न ही यह मानव की सिद्धता कही जा सकती और न ही यह मानव जीवन सफल कृतज्ञता कही जा सकती सिर्फ छड़िक संवेदना मौत पर मरहम नही बन सकती इसलिये समाधान ऐसा हो जिससे फिर पुनरावृति न हो जिसके लिये ब्यवस्था को प्रमाणिक पुरूषार्थ का मार्ग चुनना होगा और माननीयो आपको उसको संरक्षण दे स्वयं की सिद्धता सिद्ध करनी होगी मगर हो सकता सर्बकल्याण के रास्ते यह सम्भव न हो क्योकि सत्ता का मार्ग शायद इसकी इजाजत सियासत को नही देता और यही कारण है कि हटाने लगाने के अचूक अस्त्र से समाधान का मार्ग प्रस्त होता रहता है क्योकि वोट की बैबसी कुछ हे ही  ऐसी राजधर्म के आढ़े आती है जब तक तुर्टी पर स्पष्ट दण्ड का प्रवधान और सियासत के इशारे पर विधि का माखौल उड़ाने बालो को विधिसम्बत नही किया जायेगा तब तक न तो हादसे रूकने बाले न ही हटाने लगाने से लोग सुधरने बाले है जब सेबा मूल्य लिया जाता तो फिर जबाबदेही मे कोताही क्यो ? क्योकि जब भी बेगुह ऐसे हादसो के शिकार होते है तो दुख भी होता है और दर्द भी होता है  मगर समाधान के अभाव मे हम फिर किसी नये हादसे मे मौतो पर मातम मनाते या संवेदना जताते है मगर समाधान से मेहरूम रह जाते हर एक नागरिक के लिये शर्मनाक भी और दर्दनाक भी होना चाहिए शायद इस सच हमारे माननीय , सियासतदान जितनी जल्द समझले उतना बैहतर होगा कही ऐसा न हो कि जिनकी आस्था आज आप मे है उस पर उन्है कभी विचार करना पढ़े जो न तो ब्यबस्था के हित मे होगा न ही ऐसी सत्ता सियासत के हित मे होगा ।   

 

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