टूटता विश्वास विलखते लोग , मौजूद व्यवस्था पर बड़ा सबाल


बैहाल भबिष्य को समृद्धि खुशहाॅली की तलाश 

व्ही.एस. भुल्ले 


विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

भले मौजूद सत्ता सियासत का दाबा भबिष्य की समृद्धि खुशहाॅली को पुख्ता हो मगर व्यवस्था को लेकर टूटता विश्वास आज एक बड़ा सबाल बनता जा रहा है जिससे न तो मौजूद सियासत अछूती है न ही सत्ताये अगर यो कहै कि सत्ताओ को लेकर या सतत सत्ता मे बने रहने को लेकर मचे घमासान को ले तो बिलखते अभाव ग्रस्त लोगो के लिये आने बाले समय मे शायद ही कोई शुभ समाचार हो क्योकि आय दिन टूटता व्यवस्थागत विश्वास अब उस किनारे तक जा पहुॅचा जहाॅ लोगो के सर्ब का बाॅध टूटना तय है फैसला मौजूद सियासत सत्ताओ को करना है कि आखिर ऐसी स्थति आम लोगो के बीच क्यो बनती जा रही है कारण साफ है सत्ता तक पहॅंुचने का आसान तरीका और लोगो की बैहिसाब महात्वकांक्षा तथा तथाकथित स्वार्थ जो न तो सियासत को सही दिशा देने तैयार है न ही सत्ता को अपना राजधर्म पालन कर सर्बकल्याण के मार्ग पर बने रहने समझाईस को तैयार अब ऐसे मे कैसै हो सेवा और कैसै हो कल्याण । समृद्धि खुशहाॅली की तलाश मे भटकता जीवन अब तो स्वयं के सुनहरे सपने को लेकर हैरान परेशान है जो जीवन मे निराशा का भाव पैदा कर उसे नये सिरे से सोचने पर मजबूर करता है बैहतर हो कि जबाबदेह लोगो तत्काल बढ़ती अविश्वास की समस्या पर विराम लगा विश्वास का मार्ग व्यवस्था मे दृढ़ता के साथ प्रस्त करे कही ऐसा न हो कि टूटता विश्वास हमारी सेकड़ो बर्ष की तपष्या को एक झटके मे बर्बाद कर दे । क्योकि जो हालिया हालात और विश्वास आमजन के बीच सत्ताओ , सियासत के है वह बड़े ही दयनीय कहै जा सकते है कहते है कभी सत्ता का कहा ईश्वर का हुकम माना जाता था और आज भी जनता को सियासी गलियारो मे भगवान कहा जाता है मगर खुद का पैट काट व्यवस्था का पेट भरने उस पर कृपा बरषा उसे धन धान्य करने बाली भगवान जनता जनार्दन स्वयं अविश्वास की शिकार है उसका टूटता विश्वास यह समझने काफी है कि अब उसकी नजर मे सियासत सत्ता का वह सम्मान नही रह गया जिसके की वह पात्र है काश इस सच को जितनी जल्दी हो हम समझ पाये तो यह व्यवस्था और सत्ता सियासत की सबसे बड़ी सार्थकता सफलता होगी । जय स्वराज । 



 

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