हटो बचो की सियासत में भटकता सेवाकल्याण


अहम अहंकार के बीच झूलता समाधान 

व्ही. एस भुल्ले 


विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.

समाधान के नाम जिस तरह से सियासत मे अहम अहकांर और   हटो बचो की संस्कृति सर चढ़कर बोल रही है उससे भले ही विकास सेवा कल्याण अपने मूल मार्ग से भटक बंटाढार के कागार पर हो मगर सियासत है कि वह सुधरने का नाम ही नही ले रही जो हमारे लोकतंत्र के लिये शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी है मगर इसके उलट जहाॅ हमारे माननीयो की कमजोरी सतत सत्ता सुख है तो श्रीमानो की बैबसी उनकी अच्छी अच्छी पदस्थापना और वह भी सतत सम्पूर्ण सेवा काल अब ऐसे मे समाधान सेवाकल्याण कैसै हो यह आज उन क्षणिक स्वार्थ मे डूबे लोगो को समझने बाली बात होना चाहिए आज जिस तरह से सियासत अहम अहंकार के रथ पर सबार गांडीब की प्रतंचा खीच समाधान के तीर से विकास सेवा कल्याण के लक्ष्य को भेदना चाहिती हे वह एक अक्षम असफल प्रयास ही नही स्वयं की निष्ठा के साथ क्रूर असंवेदनशीलता भी होगी जिसके परिणाम अगर आने बाले समय मे एक बटाढार व्यवस्था के रूप मे हमारे सामने हो तो किसी को अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए । चैपट होते व्यवस्थागत ढ़ाचे के बीच जिसमे आने बाले समय मे माननीय श्रीमान आमजन यानी सभी को मिलजुल कर रहना और आने बाले समय मे सभी यही फसल काटना तो फिर जीवन समृद्ध खुशहाॅल कैसै रहेगा क्योकि भूभाग वही रहना है और व्यवस्था भी यही रहनी है अन्तर सिर्फ इतना होगा कि किसी के पास कोठी बंगले मल्टी मोटा बैंक बैलैसं तो कोई झोपड़ी फक्कड़ होगा मगर जीवन के सरोकार तो वही रहने बाले फिर निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन मे कोताही क्यो ? आज सभी के लिये यह समझने बाली बात होना चाहिए मगर लगता नही कि फिलहाॅल हम कोई सबक लेने बाले है क्योकि हर एक का अपना अपना ऐजंडा है और हर एक को अपनी अपनी कावलियत पर पूर्ण भरोसा जिसमे बौद्धिक बिद्या का तो कहना ही क्या जिसका भण्डार शायद और किसी के पास हो शायद यही सोच सेवाक्ल्याण समाधान के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है जब तक हम इसका निदान नही खोज लेते और विकास का स्वीकार्य रोडमैफ सुरक्षित कर अंगीकार कर उसमे अपनी आस्था व्यक्त नही करते तब तक समाधान सेवा कल्याण अधर मे यू ही झूलता रहेगा और विकास नाम बंटाढार का खेल चलता रहेगा । जय स्वराज ।    

 

 

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