विकास की धुन्ध और अधर मे सपने सामर्थ हुआ बैहाल
स्वार्थ के पीछे दौड़ता पुरूषार्थ, शर्मसार हुआ सर्बकल्याण
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
सर्बकल्याण की सारथी सियासत आज जिस चैराहे पर निढाल खड़ी है आज उसे ही अब अस्तित्व के लाले जान पढ़ते है फिर सत्ता सिहांसन पर आरूढ़ हो या फिर सड़क पर स्वार्थवत सियासत और आमआचरण ने यह सिद्ध कर दिया कि सर्बकल्याण मानव जीवन से आज भी कोसो दूर खड़ा है और अधांधुन्ध विकास मे सपने अधर मे ही रहने बाले है बैहाल सामर्थ और स्वार्थ के पीछे भागता पुरूषार्थ ये सिद्ध करने काॅफी है कि आने बाले समय मे अगर यही हाॅल रहा तो समुचा मानव जीवन कंटको से मुक्त नही रहने बाला है । अगर हम म.प्र. को ही ले तो विगत 30 बर्षो मे जिस तरह दो दो पीढ़िया अभावो के बीच सफर कर चुकी है लगता वह क्रम थमने बाला नही कारण जिस तरह से पुरूषार्थ को सामर्थ सत्ता के पीछे भागने की आदत पढ़ चुकी है और स्वयं स्वार्थो के चलते सर्बकल्याण के भाव से विरक्ति हुई है उसने उस युवा पीढ़ी को तो कही का न छोड़ा जिसने पुरूषार्थ का समय सत्ता की कृपा और संसाघनो के अभाव मे निकाल दिया और जो पचपन नये नये सपने लेकर जवान हुआ वह सम्मानजनक संसाधनो के अभाव सियासत का पिछलग्गू बन सियासत का गुलाम हो लिया या फिर फ्रस्टेट होकर घर बैठ लिया ऐसे मे नये सिरे से सजती सियासत के मुखिया, योद्धा इधर भी है और उधर भी है ये सही है और यह वही है ये जिन्हे आने बाली नस्ल एक कलंकित योद्धाओ और सिपहसालारो के रूप मे याद करेगी क्योकिा इतने बढ़े पैमाने पर जीवन का विनाश तव नही हुआ जब सत्ता सिहांसन के लिये जंग आमने सामने की मैदाने जंग मे हुआ करती थी तब तो मेदाने जंग मे लड़ने बाला योद्धा ही शहीद होता था मगर इन तीस बर्षो मे जिस तरह से मानवता ही नही समुचा जीव जगत कल्फा है और जीवन संकट कंटको से भर गया है इसका आभास आज भी हमे न हो मगर आने बाला कल जब मौजूद हमारे उत्तराधिकारियो से सबाल करेगा तब उनके पास हमे गरियाने के अलावा दूसरा चारा नही होगा बैहतर हो सत्ता सियासत के पिछलग्गू बनने के बजाये हम और हमारी पीढ़ी स्वस्वार्थ छोड़ सर्बकल्याण के बारे मे विचार करे और एक दूसरे को साथ लेते हुये एक नई जीवन यात्रा शुरू करे और एक शिक्षित, स्वस्थ, समृद्ध पीढ़ी को तैयार करे क्योकि जो सत्ताये सियासत अभी तक जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बनाने मे असफल अक्षंम सिद्ध रही है वह कैसे हमारा, हमारी आने बाली पीढ़ी के जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बनायेगी हमे सोचने बाली बात होना चाहिए।जय स्वराज ।

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