सियासी संरक्षण मे दम तोड़ता सेवा कल्याण , मातम मनाता सर्बकल्याण , आहत होते सरोकार

 

ये अंगीकार सियासत सत्ता की बैबसी है या मजबूरी 

व्ही. एस. भुल्ले


विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

बहूमूल्य जीवन को बैबजह गबाने बालो की इसे बैबसी कहै या मजबूरी जो अन्य किसी की गलती का खामियाजा उन्है अपनी जान गबाॅकर चुकाना पढ़ता है शायद आज की व्यवस्था का सच यही है सेवाकल्याण को बाधित कर अपना हक माॅगने बाले व सत्ता की दरियादिली का लाभ उठाने बाले उन मूड़धन्यो को कौन समझाये की अपके निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन का मय सूत के निर्दोशो को कितना बड़ा मूल्य जान देकर चुकाना पढ़ रहा है मगर सियासी संरक्षण है जो सत्ता लालसा के आगे यह मानने तैयार ही नही की कुछ गलत जीवन मे हो रहा है चीखते मानवीय सरोकार इस बात के गबाह है कि किस बैरहमी से उन्है सेवा कल्याण के नाम सरेयाम रौधा जा रहा है कारण स्वार्थवत सियासी संरक्षण और प्राप्त संरक्षण मे पनपता आदमखोर स्वभाव आज यह स्वभाव भले ही स्वार्थपूर्ति और स्वकल्याण का अचूक हथियार हो मगर यह भी सत्य है कि मन का धन जो भी करले मगर रहना सभी को इसी व्यवस्था मे है फिर आज ओहदा जिसका जो भी हो और रसूख जैसा भी बिगड़ी व्यवस्था से बचने बाला कोई नही इसलिये आज सभी को समझने बाली बात यह होना चाहिए कि जहाॅ भी हमारी जबाबदेही जिस भी रूप मे सुनिश्चत है उसका हमे निष्ठापूर्ण निर्वहन करना चाहिए जो सभी के लिये सुखद और सराहनीय आने बाले समय मे कही जायेगी और आज यही एक बड़ा सच है जो समझने बाली बात हर एक जबाबदेह नागरिक के लिये होना चाहिए । जय स्वराज । 


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