राष्ट्र नेतृत्व से बेरूखि क्यो ?


सकारात्मक सृजनात्मक बिरोध विपक्ष का कर्तव्य 


व्ही. एस. भुल्ले 

विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

लोकतंत्र मे सकारात्मक सृजनात्मक विरोध विपक्ष का कर्तव्य होता है और उसका सत्ता के लिये संघर्ष भी मगर विरोध जब राष्ट्रहित और संबैधानिक पद की अनदेखी कर सिर्फ विरोध को ही सत्ता प्राप्ती का मार्ग समझ ले तो वह न तो सृजन के हित मे होता है न ही जीवन के हित मे और नेतृत्व विरोध तो एक तरह से उस ब्यवस्था का विरोध हुआ जिसे हमने अंगीकार कर रखा है इस तरह के कृत्य से मानव जीवन को तो छति होती ही है साथ ही राष्ट्रीय आचरण पर भी सबाल होते है अगर विधान ने किसी भी दल को 5 बर्ष तक उसकी नीतियो के हिसाब से देश चलाने का मोका दिया है तो फिर उसकी लोकतांत्रिक आस्था पर अविश्वास क्यो ? क्यो उसकी शफथ पर सबाल हो रहै है जब सियासी इसारो पर महिनो आन्दोलन अहिसा पूर्ण हो सकते है तो फिर मात्र डेढ़ माह मे सम्पन्न होने बाले चुनावो मे सत्ताधारी दल से असहयोग कर उसे उसकी करनी का फल नही दे सकते अगर उसने विधि विरूध या आमजन की आशा आकांक्षा विरूध कोई कृत्य किया है तो उसे चुनावो मे क्यो धूल नही चटा सकते ज्ञात हो कि अन्ना आन्दोलन मे भी तो काॅग्रेस ने आमजन को चुनाव लड़ सत्ता हासिल कर कानून बना जनहित पूरे करने की बात अहंकार मे कही थी परिणाम की पुरूषार्थियो ने पुरूषार्थ किया और काॅग्रेस के हाथ से दिल्ली निकल गई । क्योकि अगर शिकायत सत्ता से है तो सत्ता तो मजे मे है मगर सड़को पर परेशान तो हमारे अपने हो रहै है समय और धन का नुकसान तो राष्ट्र का हो रहा है मर तो हमारे अपने लोग मर रहै है अगर सरकार कह रही है कि 3 कानून राष्ट्र जनहित के है तो 2-3 बर्ष के लिये मौका देने मे हर्ज क्या जब किसान का मुगल अंग्रेज और आजाद भारत मे 72 बर्ष सत्ता चलाने बाले कुछ नही उखाड़ सके तो ये 3 कानून या 2-3 उद्योग पति क्या कर लेगे जिन पर विपक्ष आरोप मढ़ रहा है और फिर व्यापार व्यापार होता है न कि समाज सेवा ग्लोवल दौर है अगर हमे गौमाता का ताजा दूध नही आज डिब्बे का दूध और पीजा बर्गर पसंन्द है न कि गौवंश का अमृत तो फिर इतनी हड़बड़ी क्यो आज जब एक व्यक्ति राष्ट्र जन के प्रति अपनी कृतज्ञता सिद्ध कर अपनी टीम के साथ अच्छा करना चाहता है तो हमे बगैर बिचलित हुये धैर्य का परिचय देना चाहिए क्योकि स्व. इन्दिरा गाॅधी के बाद हमे सौभाग्य से नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम के रूप मे नेतृत्व मिला है इसका लाभ राष्ट्र जन और दल सियासत को उठाना चाहिए और अगर कोई असहमति है तो उसका विरोध भी किसी को बगैर कष्ट पहुॅचाये होना चाहिए जिससे हमारे द्वारा अंगीकार व्यवस्था मजबूत और सिद्ध हो सके आज यही सबसे बड़ी समझने बाली बात हमे होना चाहिए । जय स्वराज ।


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